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चाइल्ड ट्रेफिकिंग मिनट्स का खेल है, यदि चूक गए तो पता भी नहीं चलेगा कि बच्चा कहाँ बिका - प्रशांत दुबे
September 28, 2019 • Avi Dubey
 
युवाओं की बौद्धिक सशक्तता की ओर ABVP की नई पहल "TEA-TALK"
TEA-TALK युवाओं को सही दिशा दिखाने में सहायक होगा - प्रशांत दुबे।
 
"चाइल्ड ट्रैफिकिंग कुछ मिनट्स का खेल है, यदि आप कुछ मिनट या घंटों में बच्चे को नहीं बचा पाए तो आपको पता भी नहीं चलेगा कि बच्चा नॉर्थ, साउथ, ईस्ट या वेस्ट कहाँ बिका" हम और आप को चौकन्ना होकर चारों ओर नजर रखनी होगी तभी हम समाज को बच्चों के अनुकूल बना पाएंगे। इसके लिए जरूरी है कि वर्तमान युवा बाल संरक्षण से जुड़े विषयों को समझे, उससे जुड़े कानूनों को पढ़े और फिर अपनी आवाज़ उठाएं। यह विचार एबीवीपी (ABVP) द्वारा युवाओं को बौद्धिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में शुरू की गई पहल "टी-टाॅक" (TEA-TALK) में 'बाल संरक्षण एवं पॉक्सो एक्ट' विषय पर, बाल अधिकार कार्यकर्ता प्रशांत दुबे ने व्यक्त किए। यह आयोजन गुरुवार, 26 सितंबर को भोपाल स्थित एबीवीपी कार्यालय के सभागार में संपन्न हुआ। 
     ज्ञात हो कि टी-टॉक एबीवीपी द्वारा चाय पर संवाद की एक पहल है, जो हर 15 दिन में आयोजित की जाती है। इस दौरान किसी एक चर्चित एवं सारगर्भित विषय पर संवाद के लिए विषय से संबंधित वक्ता को आमंत्रित किया जाता है। चर्चा में 18 से 40 वर्ष के युवा सहभागिता कर सकते हैं। जिन्हें एक Online Google Form के माध्यम से चयनित किया जाता है। इस फार्म में विषय से संबंधित कुछ प्रश्न पूछे जाते हैं, जिनके आधार पर सहभागिता सुनिश्चित कर ई-मेल द्वारा आमंत्रण भेजा जाता है। 
           अपने संबोधन में श्री दुबे ने बाल लैंगिक शोषण, बाल विवाह, बच्चों की तस्करी, बाल श्रम आदि विषय पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि मध्यप्रदेश में रोजाना 30 बच्चे गायब हो रहे जिनमें 16 लड़कियां हैं और 9 बच्चे फिर कभी वापस नहीं मिलते हैं। उन्होंने बताया कि भोपाल में बहुत सारे बच्चे बाल लैंगिक शोषण का शिकार हो रहे हैं, यह भी ध्यान देने योग्य है कि जब भी हम बच्चे के साथ हो रहे शोषण की घटनाओं पर बात करें तो हम बच्चों की पहचान सार्वजनिक ना करें। साथ ही बच्चों से जुड़े मामले में स्वयं की भूमिका भी तय करना जरूरी है।
     श्री दुबे ने बताया कि हर बच्चा अपराधी नहीं होता, कई बार वह अपराध से पीड़ित होने के बाद स्वयं भी अपराधी की भूमिका में आ जाता है। ऐसे में बच्चे के साथ कुछ गलत होना पूरे समाज पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रहा है। संबोधन के दौरान श्री दुबे ने बताया कि "जब मैं शैक्षणिक दिनों में था उस समय ऐसे मंच उपलब्ध नहीं थे, जहां हम किसी विषय पर खुलकर चर्चा कर पाते। आज टी-टॉक यह पहल कर रहा है, इसलिए आप सभी को इस मंच के साथ जरूर जुड़ना चाहिए और अपने विषय भी तैयार करने चाहिए। हो सकता है कुछ विषय हमारी पहुंच से दूर हों लेकिन आप उन विषय पर कुछ बेहतर जानकारी दे सकें। आप किसी के कहे अनुसार अपनी राय ना बनाएं, चीजों को सुनें, समझें और उस पर स्वयं की राय विकसित करें। 
        इस चर्चा में मॉडरेटर की भूमिका में प्रो. इंदिरा जावेद ने टी-टॉक (TEA-TALK) की अवधारणा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आज का समाज आधुनिकता की ओर तेजी से भाग रहा है, ऐसे में युवा सफलता के लिए शॉर्टकट अपनाने का प्रयास करते हैं। वह स्वयं के बौद्धिक सशक्तिकरण पर जोर नहीं देते टी-टाॅक उन युवाओं के लिए ही एक मंच तैयार किया गया है जोकि युवाओं के लिए युवाओं द्वारा ही संचालित किया जाता है। चर्चा के अंत में आभार व्यक्त करते हुए अभिलाष ठाकुर ने कहा कि मुझे खुशी है कि आज बच्चों से जुड़े मुद्दे पर बात करने के लिए हम सभी एक साथ उपस्थित हुए। ऐसी चर्चाओं की सार्थकता तभी है जब हम सतर्कता के साथ समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाएंगे। "चाय पर चर्चा" में 112 (पंजीयन अनुसार) युवाओं ने सहभागिता की। 
 
अभिलाष ठाकुर
(टी-टॉक संयोजक)