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पार्षदों के जरिए महापौर, नगर पालिका व नगर परिषदों के अध्यक्ष के चुनाव का  भाजपा का विरोध समझ से परे ?
September 27, 2019 • Avi Dubey

यदि कोई जमीनी जनप्रतिनिधि, महापौर या अध्यक्ष के उच्च पद तक पहुंचता है तो भाजपा को इसमें आपत्ति क्यों ?
भाजपा को क्यों पार्षदो की निष्ठा पर संदेह ?
क्यों उन्हें लगता है कि पैसे के बल पर पार्षदों को खरीदा जा सकता है ? यह पार्षदों व जमीनी लोगों का अपमान
इस विरोध से भाजपा की मानसिकता उजागर: नरेंद्र सलूजा


भोपाल, 26 सितम्बर 2019
मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष के मीडिया समन्वयक नरेंद्र सलूजा ने बताया कि कल राज्य के मंत्रिमंडल की बैठक में यह प्रस्ताव पास किया गया कि अब महापौर, नगर पालिका व नगर परिषद के अध्यक्ष का चुनाव पार्षद करेंगे, यह निर्णय बेहद स्वागत योग्य है लेकिन इसका भाजपा क्यों विरोध कर रही है, यह समझ से परे है?
सलूजा ने कहा कि यदि इस निर्णय से कोई जमीनी, आर्थिक रूप से कमजोर जनप्रतिनिधि महापौर व अध्यक्ष जैसे उच्च पद पर पहुंचता है तो भाजपा को इसमें आपत्ति क्यों है? आखिर भाजपा को पार्षदों की निष्ठा पर संदेह क्यों है? क्यों उन्हें लगता है कि पार्षदों को पैसे के बल पर खरीदा जा सकता है? क्योंकि शिवराज जी इस निर्णय से खरीद फरोस्त बढ़ने का आरोप लगा रहे है। यह तो जमीनी पार्षदों का अपमान है। यह सच है कि भाजपा धनाढ्य वर्ग की पार्टी मानी जाती है, भाजपा में जमीनी कार्यकर्ताओं व जनप्रतिनिधियो की सदैव उपेक्षा होती है। शायद इसलिये भाजपा इस निर्णय का विरोध कर रही है।
सलूजा ने कहा कि भाजपा इस निर्णय का विरोध कर यह साबित कर रही है कि वह जमीनी व आर्थिक रूप से कमजोर लोगों की विरोधी पार्टी है। शायद भाजपा भी इस सच्चाई को जानती है कि जमीनी व गरीब व्यक्ति भाजपा की रीति-नीति के कारण उसके विरोध में हैं, इसीलिए उन्हें इस निर्णय से अपनी हार का डर सता रहा है।
सलूजा ने कहा कि प्रत्यक्ष प्रणाली से होने वाले चुनाव में विकास कार्य भी प्रभावित होते थे, क्योंकि बहुमत किसी अन्य दल का व महापौर-अध्यक्ष किसी अन्य दल के होने से आपसी प्रतिस्पर्धा में विकास कार्य प्रभावित होते थे। इस निर्णय से उस पर रोक लगेगी। इससे विकास कार्यों में तेजी आएगी व आपसी सामंजस्य बना रहेगा, तानाशाही व मनमानी समाप्त होगी। ऐसे कई उदाहरण प्रदेश में आज भी मौजूद है। भाजपा को तो इस निर्णय का स्वागत करना चाहिए।