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शिक्षा में परिस्थिति के अनुसार बदलाव जरूरी-कुलपति डॉ.सिंह
September 14, 2019 • Avi Dubey
मशीनें कितनी भी आ जाए, लेकिन उद्यमिता का अपना योगदान- चौकसे
हमीदिया महाविद्यालय में दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ
 
शासकीय हमीदिया कला एवं वाणिज्य महाविद्यालय के वाणिज्य विभाग द्वारा उच्च शिक्षा विभाग मध्यप्रदेश शासन के सहयोग से 'वाणिज्य एवं प्रबंध में समकालीन शोध' विषय पर  दो दिवसीय राष्ट्रीय शोध संगोष्ठी का शुभारंभ श्री श्री विश्वविद्यालय के कुलपति अजय सिंह,क्षेत्रीय अतिरिक्त संचालक डॉ.महेंद्र रघुवंशी,ऑल इंडिया कॉमर्स एसोसिएशन के एग्जीक्यूटिव मेंबर डॉ.बीएमएस भदौरिया, प्राचार्य डॉ.पीके जैन,विभागाध्यक्ष  डॉ पुष्पलता चौकसे की उपस्थिति में किया गया।
मुख्य अतिथि कुलपति अजय सिंह ने संगोष्ठी को संबोधित करते हुए कहा कि आज तकनीक के युग में बौद्धिक कृत्रिमता के मायने बदल रहे हैं। इसलिए हमें पाठ्यक्रम और शोध में भी नवाचार करने की आवश्यकता है आज शिक्षक की भूमिका कोच एवं मेंटर के रूप में होनी चाहिए न की नॉलेज ट्रांसफर के तौर पर।
जीएसटी भारत के परिपेक्ष्य में एक अच्छा कदम है जिससे भारत क्लीन कंट्री की ओर बढ़ रहा है। दूसरे देश भारत में निवेश के लिए आकर्षित हो रहे हैं।औद्योगिक क्रांति के लगातार बढ़ने से विद्यार्थियों को उसी के अनुरूप ढालने के लिए पाठ्यक्रम में बदलाव कर स्किल डेवलपमेंट पर ध्यान देने की आवश्यकता है इसी के आधार पर सभी विश्वविद्यालयों में शोध को प्राथमिकता देनी चाहिए। सभी विश्वविद्यालय चाहते हैं कि जब छात्र पढ़कर निकले तो वें इंडस्ट्री के लिए तैयार हो।आने वाले समय में नए तरह का इंटेलिजेंस काम करेगा,आज गायों को चिप लगाकर ट्रैकिंग किया जा रहा है ऐसे ही कृत्रिम बुद्धिमत्ता के कई उदाहरण हमारे सामने है। आज हमें फल- फूल तथा अन्य सामग्रियों से मिलने वाले विटामिन्स कुछ समय बाद मशीन के सामने खड़े होने से मिलने की संभावना है ऐसे में फल सब्जियां म्यूजियम में देखने को मिल सकते है।
विभागाध्यक्ष डॉ.पुष्पलता चौकसे ने प्रस्तावना वक्तव्य देते हुए कहा कि वाणिज्य में समकालीन शोध की आवश्यकता को देखते हुए इस विषय का चयन किया।मशीन कितनी भी आ जाए लेकिन उद्यमिता का अपना योगदान हमेशा से रहा है हम रोबोट से सदैव आगे रहेंगे क्योंकि उसको बनाने वाले हम ही हैं। संगोष्ठी में
जीएसटी एक नया विषय है इसके प्रभाव, हानि और लाभ पर विमर्श होगा। बड़ी-बड़ी कंपनियां छोटी-छोटी कंपनियों को निगल रही है आज व्यापार और व्यवसाय का मूल उद्देश्य लाभ कमाना हो गया है ऐसे समय में सामाजिक दायित्व का निर्वहन जरूरी है जिससें सशक्त समाज का निर्माण हो सकें।डॉ.बीएमएस भदौरिया ने कहा विश्व की अर्थव्यवस्था मंदी की ओर जा रहे ही है ऑटो सेक्टर, जीडीपी को सुदृढ़ करने एवं अर्थव्यवस्था में सुधार के लिए संगोष्ठी में विभिन्न विषयों पर विमर्श किया जा रहा है यह एक अच्छी बात है।संचालन डॉ.प्रमोद के वर्मा एवं आभार डॉ अनिल शिवानी ने व्यक्त किया।
 
सत्र-
 
सत्र में वक्ता डॉ. एसके खटीक मुख्य अतिथि डॉ.चंचल भुट्टन तथा अध्यक्षता डॉ. यू एन शुक्ला ने की। इस सत्र में दिल्ली से डॉ.फारुकी,भोपाल से प्रीति चतुर्वेदी,दीपिका हसानी सहित अन्य शोधार्थियों ने शोध पत्र पढ़े।संचालन डॉ.अनिल शिवानी ने किया।डॉ.एसके खटीक ने कहा कि किसी भी देश की अर्थव्यवस्था वहां के लघु उद्योगों पर निर्भर करती है जिसके लिए अनुभवी व प्रयोगात्मक छात्रों की आवश्यकता है। सभी सरकारों को लघु उद्योगों के लिए विस्तृत पॉलिसी बनाने पर ध्यान देना चाहिए।