ALL Current events Technology Social RGPV Updates COVID-19
"किताबें बातें करती हैं" : जनसम्पर्क मंत्री पीसी शर्मा
November 10, 2019 • Avi Dubey

पब्लिक रिलेशंस सोसायटी ने किया अंतर्राष्ट्रीय हिन्दी साहित्यकारों का सम्मान

भोपाल | "किताबें बातें करती हैं" यह कहना था जनसम्पर्क मंत्री पीसी शर्मा का जो विश्व रंग कार्यक्रम के दौरान पब्लिक रिलेशंस सोसायटी द्वारा अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर हिन्दी की सेवा और प्रचार-प्रसार के लिए पूरे विश्व में कार्य कर रहे अप्रवासी भारतीय साहित्यकारों के सम्मान कार्यक्रम में मुख्य अतिथि थे । उन्होंने आज सम्मानित हुए सभी साहित्यकारों को बधाई और शुभकामनाएं देते हुए कहा की पब्लिक रिलेशंस सोसायटी के इस आयोजन ने पूरी दुनिया को भोपाल में इक्कठा कर दिया हैं। उन्होंने कहा जब कोई व्यक्ति विदेश जाता है तो अपनी संस्कृति को भी लेकर जाता है आज आप्रवासी भारतीय साहित्यकारों ने विदेशों में अपनी संस्कृति की छाप छोड़ी है जो हमारें लिए गर्व की बात हैं, इसलिए उनका आदर और सम्मान जरुरी है। उन्होंने विश्व में हिंदी के व्यापक प्रसार के चार कारण  बताये - हिंदी फिल्में जो विदेशों में भी पसंद की जाती हैं, भारतीय सेना जिसमे हर कमांड हिंदी भाषा में दिया जाता है, रेलगाड़ी जो कश्मीर से कन्याकुमारी तक को जोड़ती है, और सबसे महत्वपूर्ण उन्होंने विदेशों में बसे हिंदी साहित्यकारों और लेखकों को बताया |

वाणिज्य कर मंत्री ब्रजेन्द्र सिंह ने अपनी बात रखते हुए कहा जिस तरह शरीर को चलने के लिए भोजन की आवश्यकता होती है उसी प्रकार अच्छे साहित्य की आवश्यकता मन को बेहतर तरीके से चलने के लिए होती है | उन्होंने साहित्य को पढ़ना भी एक साधना बताया और युवाओं से आव्हान किया की उन्हें इस डिजिटल युग में भी किताबें पढ़ना कम नहीं करना चाहिए |

प्रसिद्ध लेखक एवं चिंतक श्री रघु ठाकुर की अंतर्राष्ट्रीय हिंदी साहित्यकार विदेशों में भारतीय संस्कृति के राजदूत होते हैं | यही लोग बहार के देशों में भारतीय मूल्यों की पहचान स्थापित करते हैं |भारत में रहने वाले लोगों से ज्यादा देश के प्रति ये लोग वफादार होते हैं | अपने देश से ज्यादा कठिन है किसी अन्य देश में अपने देश की बात रखना |

रबीन्द्र नाथ टैगोर विश्वविद्यालय के चांसलर श्री संतोष चौबे ने कहा की इस तरह के आयोजन का हमारा मकसद यह भी है पुरे विश्व में हिंदी का प्रचार प्रसार हो और डिजिटल क्रांति के दौर में भी सांस्कृतिक मूल्य बने रहे

अटल बिहारी वाजपेयी हिन्दी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. रामदेव भारद्वाज जी ने कहा यह समय भाषा की उपयोगिता पर सवाल उठाने का नहीं है बल्कि उसकी मार्किट वैल्यू समझने का है | हमें हिंदी भाषा को उसका सर्वोच्च स्थान दिलाने का है | विदेशों में बस कर कार्य कर रहे साहित्यकार अपने साथ देश की कला,संस्कृति और मूल्य भी अपने साथ लेकर जाते हैं और फिर इसका प्रसार करते हैं|

अंतर्राष्ट्रीय लेखक तेजेन्द्र शर्मा ने कहा ये बहुत गर्व की बात है दुनिया के अलग अलग साहित्यकारों का सम्मान करने का मुझे मौका मिला | अब प्रवासी लेखक भी भारतीय मुख्यधारा के लेखकों से जुड़ने लगे है |  ये सम्मान प्रवासी साहित्य को बढ़ावा देने का कार्य करेगा और गर्भनाल को 13 साल पूर्ण होने पर बधाई देता हूं |

वरिष्ठ लेखक कमल किशोर गोयनका का कहना था यह देश का पहला अवसर है जब इतनी अधिक संख्या में विदेशो के लेखकों का सम्मान किया गया हो |जब भी भोपाल आता हूं कुछ ना कुछ संस्कार लेकर जाता हूं |यहां शांति का माहौल है,  भागदौड़ से दूर साहित्य और संस्कृति का समागम है

इस सम्मान समारोह में सम्मानित होने वाले विद्वानों में तेजेन्द्र शर्मा, इंग्लैण्ड, रेखा मैत्र, अमेरिका, दिव्या माथुर, इंग्लैण्ड, प्रो. (डॉ.) पुष्पिता अवस्थी, नीदरलैण्ड, डॉ. रामा तक्षक, नीदरलैण्ड, अशोक सिंह, अमेरिका, डॉ. भावना कुँअर, ऑस्ट्रेलिया, ललित मोहन जोशी, इंग्लैण्ड, अनूप भार्गव, न्यूजर्सी, संजय अग्निहोत्री 'क्षितिज',ऑस्ट्रेलिया, उमेश ताँबी, अमेरिका, रेखा राजवंशी, ऑस्ट्रेलिया, उषा राजे सक्सेना, इंग्लैण्ड, डॉ. कविता वाचक्नवी, अमेरिका, डॉ. संध्या सिंह, सिंगापुर, श्रीमती जय वर्मा, ब्रिटेन, अनिल शर्मा, भारत, डॉ सुषम बेदी, अमेरिका, अर्चना पैन्यूली, डेनमार्क, डॉ. वंदना मुकेश, इंग्लैण्ड, रमेश जोशी, अमेरिका, धर्मपाल महेन्द्र जैन, कनाडा, रमेश दवे, भारत, डॉ. कमल किशोर गोयनका, भारत, नासिरा शर्मा, भारत, वैभव सिंह, भारत और आत्माराम शर्मा, भारत शामिल हैं।

विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं का विमोचन

इस अवसर पर विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं का विमोचन भी किया गया। जिनमें अमेरिका के कवि उमेश ताँबी का कविता संग्रह ''शब्दों की ओट में'', प्रसिद्ध व्यंग्य लेखक और 'विश्वा', अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति, अमेरिका के संपादक श्री रमेश जोशी का व्यंग्य आलेख संग्रह ''लीला का लायसेंस'', न्यूयॉर्क के प्रख्यात प्रवासी साहित्यकार व लेखक अशोक सिंह का ग़ज़ल संग्रह ''ख़्वाब कोई बिखर गया'', ऑस्ट्रेलिया की रेखा राजवंशी द्वारा संपादित व विश्व हिंदी साहित्य परिषद, दिल्ली द्वारा प्रकाशित ''बूमरैंग-२ कविताएँ ऑस्ट्रेलिया से'' (छह शहरों के चालीस कवियों की कविताओं का संकलन) और मनोज कुमार द्वारा संपादित बा और बापू के 150 वर्ष पर केंद्रित ''समागम'' (रिसर्च जर्नल) का विशेष अंक शामिल हैं

सुख़न : संगीत और उर्दू साहित्य के सफल मिश्रण ने दर्शकों को किया सम्मोहित

विश्व रंग के छठे दिन की शाम सुख़न नामक एक समूह द्वारा सजाई उर्दू की एक सुंदर महफिल के नाम रही। इसमें ग़ालिब, फ़ैज़ अहमद फ़ैज़, निदा फ़ाज़ली, जॉन एलिया, नुसरत फ़तेह अली खान और अन्य प्रसिद्ध उर्दू लेखकों की गज़ल, नज़्म, कव्वाली, शायरी और दास्तानगोई की संगीतमय प्रस्तुति से श्रोताओं को सम्माोहित कर दिया। मंच पर 8 कलाकारों ने ओ हुस्ना मेरी…, ए मोहब्बत तेरे अंजाम पर रोना आया के साथ महफिल का आगाज किया। अंत्याक्षरी की तर्ज पर हुई बैतबाजी में एक से एक बढ़कर एक नगमें प्रस्तुत किए। इस दौरान कव्वाली है कहां का इरादा तुम्हारा सनम.. की प्रस्तुति ने दर्शकों को थिरकने पर मजबूर कर दिया। “जैसे ए वादा शिकन, सादगी तो हमारी देखिये”कव्वाली प्रस्तुत की। ओम भूतकर और नचिकेत देवस्थले सुखन के उद्घोषक और निर्देशक हैं। इनके निर्देशक जयदीप वैद्य, अभिजीत धीर, मुक्ता जोशी ने अपनी बेहतरीन प्रस्तुति दी। तबले पर केतन पंवार, हारमोनियम और पियानिका पर देवेंद्र भूमे, सारंगी और ढोलक पर मंदार बगाड़े ने संगत दी। कार्यक्रम का संचालन मशहूर शायर बद्रवास्ती ने किया।

नुसरत फतेह अली खान को श्रद्धांजलि देने के लिए किया सुखन का गठन

जयदीप वैद्य ने बताया नुसरत फतेह अली खान को श्रद्धांजलि देने के लिए 4 साल पहले समूह का गठन किया था। उस समय हम घरों में इकट्ठा होते और इस तरह की प्रस्तुति का आयोजन करते। सौभाग्य से लोगों ने हमें प्यार मिला और फिर सुख़न अस्तित्व में आया। 

विश्व रंग : युवाओं की बड़ी संख्या में भागीदारी भविष्य के लिए शुभ संकेत - कमलेश्वर पटेल

टैगोर अंतर्राष्ट्रीय साहित्य एवं कला महोत्सव विश्व रंग के छठे दिन शनिवार को पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग मंत्री श्री कमलेश्वर पटेल विशेष रूप से उपस्थित थे। उन्होंने द इंक बैंड और सुखन बैंड के कलाकारों को सम्मानित किया। विश्वरंग के सफल आयोजन की शुभकामनाएं देते हुए उन्होंने कहा कि विश्व रंग कला एवं साहित्य का महाकुंभ है जिसमें युवाओं की भी बड़ी संख्या में भागीदारी रही जो निश्चित ही भविष्य के शुभ संकेत हैं।

PR Team

AISECT-Bhopal