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*शोषित वृद्धजन समाज की जिम्मेदारी  :- गोपाल भार्गव*
December 29, 2019 • Avi Dubey
नेता प्रतिपक्ष ने गढ़ाकोटा में किया वृद्धाश्रम का लोकार्पण
सागर। भारत"श्रवण कुमार"की संस्कृति वाला देश है। ऐसे देश में वृद्धाश्रम की कल्पना करना बेमानी हैं। लेकिन ऐसे वृद्ध जो किन्ही कारणों के चलते अपनों से दूर है। या बेघर है। ऐसे वृद्धजन हमारी जिम्मेदारी नहीं, आवश्यकता हैं। वे जीवन के अनुभवों के खजाने हैं जिन्हें सहेजकर रखना हर समाज एवं संस्कृति का धर्म एवं नैतिक जवाबदारी है। यह बात मध्यप्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष श्री गोपाल भार्गव ने रविवार को गढ़ाकोटा में वृद्धाश्रम भवन के लोकार्पण कार्यक्रम में कही। 
 
मध्यप्रदेश विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष श्री गोपाल भार्गव ने रविवार को सागर जिले के रहली विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत गढाकोटा नगर में 318 लाख रुपये की लागत से बने भव्य एवं सर्व सुविधा युक्त "बागवान वृद्धाश्रम" का लोकार्पण किया। यह वृद्धाश्रम 2 वर्ष पहले श्री गोपाल भार्गव ने सामाजिक न्याय एव निःशक्तजन कल्याण मंत्री रहते स्वीकृत किया था। रविवार को नेता प्रतिपक्ष श्री भार्गव ने वृद्धाश्रम असहाय वृद्धजनों को समर्पित किया। कार्यक्रम में उपस्थित वृद्धजनों का नेता प्रतिपक्ष श्री गोपाल भार्गव ने शाल ने श्रीफल से सम्मान किया।
 
*बुजुर्गों की सेवा के लिए आगे आये हर नागरिक*
      नेता प्रतिपक्ष श्री गोपाल भार्गव ने अपने उद्बोधन में कहा कि वैसे तो लेकिन वर्तमान समय में कलयुग और पाश्चात्य संस्कृति भारत में इतनी ज्यादा हावी होती जा रही है, जिससे रिश्ते नाते व मानवीयता का ह्रास हो रहा है। इस बदलते परिवेश का सबसे अधिक प्रभाव हमारे वृद्धजनों पर हुआ है।  आज हमें ऐसी कई घटनाएं सुनने को मिलती है, जिसमे बहु बेटों द्वारा परिवार के बुजुर्गों को दर दर भटकने के लिए छोड़ दिया जाता है। जबकि बुजुर्ग हमारे आदर्श है। ऐसे पीड़ित बुजुर्गो की सेवा के लिए हम सब को आगे आना चाहिए। 
 
*प्रदेश का सर्वाधिक लागत वाला सर्वश्रेष्ठ वृद्धाश्रम है बागबान*
गढ़ाकोटा में 318 लाख रुपये की लागत से निर्मित यह वृद्धाश्रम प्रदेश का सर्वाधिक लागत के साथ अत्याधुनिक वृद्धाश्रम है। शोषित पीड़ित वृद्धजनों को पारिवारिक माहौल मिले इस बात का यहां खासा ध्यान रखा गया है। इस वृद्धाश्रम  में 24 कमरे, पूजाघर, भोजन हाल के साथ वृद्धजनों के लिए भजन और मनोरंजन के लिए टेलिविज़न की भी व्यवस्था है। वृद्धजनों के आराम के लिए भी पूर्ण साफ- सफाई युक्त सुविधा है। उन्हें पर्यावरण से जोड़ने के लिए बागवानी की भी सुविधा है। ताकि वृद्धजनों को पारिवारिक वातावरण उपलब्ध हो। 
 
*वृद्धाश्रम को ऐसे मिला "बागवान" नाम*
नेता प्रतिपक्ष श्री गोपाल भार्गव ने उद्बोधन में वृद्धाश्रम का नाम "बागवान" रखे जाने पर कहा कि इस वृद्धाश्रम की परिकल्पना मेरे मन में कुछ वर्षों पूर्व उस समय आई जब मैंने फिल्म बागवान देखी थी। उस फिल्म में बच्चें अपने माँ बाप को दर दर की ठोकरे खाने को मजबूर कर देते हैं। एक समय ऐसा आता हैं जब फिल्म का नायक कहता है कि भगवान से मन्नतें माँगकर औलाद मांगते है, और यदि औलाद ऐसी होती है तो बे-औलाद होना ठीक है। इस फिल्म से प्रेरित होकर ही इस वृद्धाश्रम का नाम "बागवान वृद्धाश्रम " रखा।