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अंतरराष्ट्रीय मुशायरे में विश्व के नामचीन शायरों ने की शिरकत
November 9, 2019 • Avi Dubey

भोपाल। टैगोर अंतर्राष्ट्रीय साहित्य एवं कला महोत्सव विश्वरंग के पांचवें दिन मिंटो हॉल के मुक्ताकाश मंच पर अंतर्राष्ट्रीय मुशायरा का आयोजन किया गया। जिसमें मध्यप्रदेश शासन के उच्च शिक्षामंत्री जीतू पटवारी और गैस राहत पुनर्वास मंत्री आरिफ अकील बतौर अतिथि शामिल हुए। अंतर्राष्ट्रीय मुशायरे में विश्व प्रख्यात कवि डॉ राहत इंदौरी, वसीम बरेलवी, परवीन कैफ, शीन काफ निज़ाम, इकबाल असर, अजीज नबील समेत नामचीन शायर शामिल हुए। मुशायरे का संचालन शायर बद्रावस्ती ने किया। इस दौरान उच्च शिक्षामंत्री जीतू पटवारी ने कहा विश्वरंग – टैगोर अंतर्राष्ट्रीय साहित्य एवं कला महोत्सव की गूंज पूरे देश में ही नहीं वरन् विश्व के कई देशों में गूंज रही है।  

राहत इंदौरी की आत्मकथा का विमोचन
राहत इंदौरी की आत्मकथा 'राहत साहब' और नवीन साहब की किताब पहली बारिश का विमोचन विश्वरंग के मुक्ताकाश मंच पर किया गया। इस दौरान विश्वरंग के निदेशक संतोष चौबे,  उच्च शिक्षा मंत्री जीतू पटवारी समेत नामचीन शायर मंच पर मौजूद रहे।
आज वो टूटकर मिला है मुझे, यह शुरुआत है जुदाई की – राहत इंदौरी

विश्व प्रख्यात शायर राहत इंदौरी ने विश्वरंग अंतर्राष्ट्रीय मुशायरे में अपने चिर-परिचित अंदाज़ में दर्शकों को अपनी शायरी से झूमने पर मजबूर कर दिया। राहत इंदौरी ने कई शेरों से समां बांधा, उन्होंने पढा कि
अपना आवारा सर झुकाने को,
तेरी दहलीज़ देख लेता हूं,
और फिर, कुछ दिखाई दे, ना दे,
काम की चीज़ देख लेता हूं।।
दूसरा शेर पढ़ते हुए राहत इंदौरी ने कहा

नदी ने धूप से क्या कह दिया रवानी में,
उजाले पांव पटकने लगे हैं पानी में
अब इतनी सारी सबों का हिसाब कौन रखे,
बड़े शवाब कमाए गए जवानी में
अपनी एक ग़ज़ल में राहत साहब ने पढ़ा कि...
तेरी परछाई मेरे घर से नहीं जाती है
तू कहीं हो मेरे अंदर से नहीं जाती है,
आसमां मैंने तुझे सर पर उठा रखा है
ये तोहमत मेरे सर से नहीं जाती है
दुःख तो ये हैं कि अभी अपने सफ़े तिरछी है,
ये खराबी में मेरे लश्कर से नही जाती है,
सिर्फ एक रात का जादू जो उतरता ही नहीं,
तेरी खुशबू मेरे चादर से जाती नहीं।
युवाओं को संबोधित करते हुए राहत साहब ने कहा कि...
हमने खुद अपनी रहनुमाई की,  
और शोहरत हुई खुदाई की
मैंने दुनिया से सैकड़ों बार से बेवफाई की
आज वो टूट कर मिला है मुझे
ये शुरुआत है जुदाई की...।
वन्स मोर, वन्स मोर पर फिर आए राहत इंदौरी
राहत इंदौरी के हर शेर पर युवाओं ने दाद दी। उनके शेर पढ़ने के बाद चले जाने पर श्रोताओं के वन्स मोर की मांग पर उन्हें फिर शेर पढ़ने आना पड़ा। युवाओं ने मोबाइल पर उनके वीडियो बनाए और लगभग हर शेर पर तालियां बजाकर अपने उत्साह का इजहार किया।

इकबाल असर ने पढ़ा मेरा नाम उर्दू में खुसरो की पहेली 

अंतर्राष्ट्रीय मुशायरे में शिरकत करने पहुंचे प्रख्यात शायर इकबाल असर ने अपनी नज़्म 'उर्दू मेरा नाम मे खुसरो की पहेली' पढ़ी
उर्दू है मेरा नाम, मैं ख़ुसरो की पहेली
मैं मीर की हमराज़ हूं, ग़ालिब की सहेली
दक्‍कन के वली ने मुझे गोदी में खिलाया
सौदा के क़सीदों ने मेरा हुस्‍न बढ़ाया
है मीर की अज़्मत कि मुझे चलना सिखाया
मैं दाग़ के आंगन में खिली बन के चमेली
उर्दू है मेरा नाम, मैं ख़ुसरो की पहेली।

डॉ. परवीन कैफ के कुछ शेर...

हम क्या उन्हें जरा आजमाने लगे, वह भी आने लगे और खत भी आने लगे…

मुझे तुम सिखाने लगे शायरी, खबर है तुमको किस घराने की हूं….

मदन मोहन दानिश के कुछ शेर..

 जिंदगी में बेसबब कुछ भी नहीं होता है कोई चेहरा है तो आईना रहता हूं मैं…

विश्वरंग मुशायरा: मेरे शहर में है खुदा बहुत पर आदमी का पता नहीं- शकील आज़मी
अंतर्राष्ट्रीय मुशायरे में शिरकत कर रहे शकील आज़मी ने पढ़ा कि.. शाम होने को है घर जाते हैं, बुलंदी से उतर जाते हैं और जिंदगी सामने मत आया कर, हम तुझे देख कर डर जाते हैं। हम क्या देखें थके हारे लोग ऐसे सोते है कि मर जाते हैं रात मरहम लगाती है शकील और हम जख्मों से भर जाते हैं।