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बाल स्वप्न-लोक की सतरंगी दुनिया: ‘ए फाॅर आर्केडिया’
November 22, 2019 • Avi Dubey

सेंट पाॅल्स को-एड् स्कूल, आनन्द नगर, भोपाल में वाषिकोत्सव


बाल स्वप्नलोक की सतरंगी आभा और मधुवन का-सा मधुर बाल कल्पना का संसार साकार हो उठा सेंट पाॅल्स को-एड् स्कूल, आनन्द नगर, भोपाल के प्रांगण में। अवसर था दिनांक 21 नवंबर को प्राथमिक कक्षाओं के लिए आयोजित वाषिकोत्सव 'ए फाॅर आर्केडिया' का।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राज्य उच्च शिक्षा एवं खेल मंत्री माननीय श्री जीतू पटवारी जी, विशिष्ट अतिथि आदरणीय श्री कुनाल चौधरी जी विधायक कालापीपल और अध्यक्ष रेव्ह. फादर जस्टिन, प्रोवेंशियल सी. एम. आई., सेंट पाॅल प्रोविंस थे। कार्यक्रम का आरंभ प्रार्थना गीत से हुआ। ईश वंदना का मधुर स्वर लहरियों ने सभी को ईश प्रेम के रंग में रंग दिया। माननीय प्राचार्य, फादर जाॅनसन थरनी ने अतिथियों का स्वागत करते हुए अभिव्यक्त किया कि आज के डिजिटल युग में वर्तमान पीढ़ी को जहाँ एक ओर अनेक अवसर प्राप्त हुए, वहीं दूसरी ओर उसके दुष्प्रभाव से उन्हें बचाना, वास्तविक जगत से परिचित कराना एक बहुत बड़ी चुनौती है। आज का कार्यक्रम एवं इस प्रकार के आयोजन विद्यार्थियों को उनकी क्षमताओं से परिचित कराने का प्रयास है। इसके साथ ही हमारा प्रयास नई पीढ़ी में मातृ भूमि के प्रति सच्चा प्रेम, हर प्रकार से सच्ची सेवा का भाव विकसित करना है। इस अवसर पर अनेक रंगारंग कार्यक्रम प्रस्तुत किये गये। जिसमें पर्यावरण संरक्षण सर्वधर्म समभाव, शिक्षा का महत्व, मनोविकार का त्याग तथा संत चावरा पर नृत्य नाटिका आदि विषयों के माध्यम से नैतिक मूल्यों का विकास किया गया।
नन्हें-मुन्ने बच्चों द्वारा प्रस्तुत स्वागत नृत्य ने भावभीने स्वागत-भाव को जीवंत कर दिया। महाकवि कालीदास की अमरकृति मेघदूत पर आधारित नृत्य नाटिका 'मेघदूतम' ने अभिनय, नृत्य एवं अभिव्यक्ति कौशल का अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत करते हुए सभी के मर्म को छू लिया।
इस अवसर पर विगत 25 वर्षों से विद्यालय को अपनी समर्पित सेवाएं प्रदान करने वाले शिक्षकों को सम्मनित किया गया।
ए फाॅर आर्केडिया नृत्य-नाटिका ने बालमन के स्वप्न, उनकी आकांक्षाओं तथा कल्पना लोक की सैर कराने के साथ, उनके कष्टों से भी परिचित कराने का सुंदर प्रयास किया। 'आई वांट बी अ चैंपियन' नृत्य के माध्यम से नैनिहालों ने विश्व-विजय की कामना को मूर्त करने का सुंदर प्रयास किया गया।
माननीय मुख्य अतिथि महोदय ने अपने प्रेरक उद्बोधन में विविध क्षेत्रों में विद्यार्थियों के बहुमुखी विकास में विद्यालय के योगदान तथा शिक्षकों के समर्पण की प्रशंसा करते हुए कहा कि भावी पीढ़ी में जीवन की समझ तथा सेवा के संस्कार विकसित करने में इस प्रकार के कार्यक्रम अहम् भूमिका निभाते हैं उन्होंने अविभावकों को अपने बच्चों को ऐसे कार्यक्रमों में भाग लेने हेतु प्रोत्साहित करने की प्रेरणा दी। माननीय विशिष्ट अतिथि ने संदेश दिया कि पर्यावरण संरक्षण आवश्यक है। अपने चारों तरफ स्वच्छता रखें। माननीय अध्यक्ष महोदय ने अपने उद्बोधन में कहा कि जीवन की वास्तविकता एवं उसके सौन्दर्य को समझने की सीख देना एवं उनके भीतर छिपी प्रतिभा से उनकी पहचान कराना आज के कार्यक्रम का उद्देश्य है।
समापन नृत्य ने सभी को थिरकने पर विवश कर दिया। राष्ट्रगान के साथ ही कार्यक्रम सम्पन्न हुआ।