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भागवत भक्ति ही मोक्ष का मार्ग है-स्वामी वासुदेवानन्द सरस्वती जी महाराज
December 23, 2019 • Avi Dubey
भोपाल (महामीडिया) आज महर्षि उत्सव भवन छान भोपाल में शंकराचार्य स्वामी वासुदेवानन्द सरस्वती जी का आशीर्वाद एवं सत्संग सभा का आयोजन किया गया। सर्वप्रथम महर्षि संस्थान के मुखिया ब्रह्मचारी गिरीश जी ने परम पूज्य अनन्त श्री विभूषित ज्योतिष्पीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी वासुदेवानन्द सरस्वती जी महाराज की अगुवानी की।
परम पूज्य सरस्वती जी महाराज ने आशीर्वाद देते हुए कहा कि भक्ति वेदांत का मुख्य आधार है भगवद्गीता में इसका विस्तार करते हुए ब्रह्म का वर्णन किया गया है जो सत्य का स्वरूप है, ज्ञान का स्वरूप है, अनन्त स्वरूप है अर्थात् वह परमात्मा तुम्ही हो। यह आत्मा ही ब्रह्म है, इसका आध्यात्मिक ज्ञान ही ब्रह्म है। मैं कौन हूँ मैं ब्रह्म ही हूँ, वह कौन है जिसे न देख पा रहे हैं, जिसे ना सुन पा रहे हैं वह भी ब्रह्म है। किन्तु इसका बोध कैसे हो। सत्कर्म सदैव अन्तः करण की शुद्धि के लिए करना चाहिए, मोक्ष की प्राप्ति के लिए साधना करना चाहिए। ध्यान एक प्राचीन वस्तु है जिसे महर्षि महेश योगी जी ने बहुत ही आसान विधि से भावातीत ध्यान के रूप में पूरी दुनिया को दिया अर्थात् यह पूरी तरह एक नवीन ज्ञान बना। परमात्मा प्राप्ति के लिए सर्वश्रेष्ठ साधन भक्ति है। हम धर्म की जिज्ञासा करते हैं कुछ कर्म करने के पश्चात् जीवन धर्ममय हो जाता है भगवान के गुण में, भगवान के नाम में रस प्राप्त करना भजन है। जिस तरह पशु जुगाली करके एक एक आहार को चबाता है उसी प्रकार भगवान के नाम का चिन्तन करें तो वह भजन है। दूसरा भजन है भावभक्ति, तीसरा भजन है मुख से नाम बोलो और कर्म करते चलो। कुछ लोगों का सिर गुरूदेव के चरणों में झुकता नहीं है किन्तु वह शाष्टांग प्रणाम करते हैं। हम वैदिक लोगों को चाहिए कि हम अर्थ का भी अनुसंधान करायें। शरीर परिवर्तनशील है नश्वर नहीं है इसलिए भगवान का नाम लेना चाहिए, हमें गुरूजनों का दर्शन करना चाहिए हमें प्रत्येक अंग से भगवान की भक्ति करनी चाहिए इन्हीं वचनों के साथ शंकराचार्य भगवान नें सभी उपस्थित जनों को आशीर्वचन दिये। सर्वप्रथम कार्यक्रम की शुरूआत महर्षि संस्थान की परम्परानुसार गुरूपूजन से प्रारम्भ हुई एक हजार से अधिक दर्शक संख्या वाले महर्षि उत्सव भवन में खचाखच उपस्थित भक्तों ने बारी-बारी से चरणपादुका का पूजन कर भक्तिलाभ प्राप्त किया। इस अवसर पर महर्षि संस्थान के समस्त निदेशक, अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित थे।