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भोपाल हाट में स्पेशल हैण्डलूम एक्सपो 9 से 24.2 तक
February 7, 2020 • Avi Dubey

भोपाल हाट, अरेरा हिल्स में 09.2.2020 से 24.2.2020 तक स्पेशल हैण्डलूम एक्सपो का आयोजन किया जा रहा है। यह कार्यक्रम विकास आयुक्त (हाथकरघा), वस्त्र मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा प्रायोजित है, जिसका आयोजन संत रविदास म.प्र. हस्तशिल्प एवं हाथकरघा विकास निगम द्वारा किया जा रहा है। इस एक्सपो में देश के विभिन्न राज्यों की लगभग 70 बुनकर समितियाँ भागीदारी करेंगी। एक्सपो का मुख्य आकर्षण म.प्र. हस्तशिल्प एवं हाथकरघा विकास निगम द्वारा तैयार किया गया दी रॉयल हैरिटेज कलेक्शन होगा, जिसके अंतर्गत विवाह जैसे शुभ-मंगल अवसर पर पहने जाने वाले लंहगे, साड़ी, शेरवानी, पगड़ी और टाई आदि होंगे। यह जानकारी श्री राजीव शर्मा, आयुक्त सह प्रबंध संचालक, हाथकरघा संचालनालय एवं प्रबंध संचालक म.प्र. हस्तशिल्प एवं हाथकरघा विकास निगम द्वारा दी गई।  श्री शर्मा ने बताया कि इस आयोजन को निगम स्वयं/अन्य स्रोतों से भव्य रूप देने का प्रयास करेगा। प्रतिदिन सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जावेगा। इसमें उड़ीसा, कर्नाटक, पश्चिम बंगाल, राजस्थान, जम्मू कश्मीर, उत्तर प्रदेश, बिहार, छत्तीसगढ़ के साथ मध्यप्रदेश के बुनकर भी भागीदारी करेंगे। आयोजन का मुख्य उद्देश्य हाथकरघा को प्रोत्साहन एवं मार्केटिंग प्लेटफार्म उपलब्ध कराना है। इसमें भागीदारी समितियाँ अपनी दरों पर सामग्रियाँ विक्रय करेंगी, जिस पर किसी भी प्रकार का सेवा प्रभार नहीं लिया जावेगा। म.प्र. शासन द्वारा निरंतर प्रयास किया जा रहा है कि न केवल प्रदेश की बल्कि हमारे देश की हाथकरघा परंपरा एवं संस्कृति को संरक्षण प्रदान किया जा सके। निगम ने इस वर्ष राजशाही काल की वस्त्र बुनाई परंपरा को आधुनिकता के साथ पुनर्जीवित करने का प्रयास किया है, जिसके अंतर्गत शुद्ध सोने और चांदी की जरी से तैयार साड़ियां, लंहगे, शेरवानी, पगडी आदि बनाये गये हैं। रेशम के वस्त्रों पर बाघ और भैरोगढ़ प्रिंट से आकर्षक टाईयाँ तैयार कराई गई हैं, जो दी रॉयल हैरिटेज कलेक्शन के नाम से भोपाल हाट में मृगनयनी के स्टॉल में विशेष रूप से विक्रय हेतु उपलब्ध रहेगी। इसके अतिरिक्त निगम द्वारा प्रदेश के शिल्पियों की कला को नया आयाम देने का प्रयास किया गया है और इसे आधुनिक फैशन के साथ भी जोड़ा गया है। प्रदेश के एतिहासिक, पुरातात्विक और सांस्कृतिक महत्व के स्थलों की महत्वपूर्ण धरोहरों को शिल्पों में उकेरने का प्रयास किया गया है। इसके अंतर्गत सॉची का सुप्रसिद्ध स्तूप - भैड़ाघाट, जबलपुर के पत्थर से उकेरा गया है, मंदसौर के पशुपतिनाथ की प्रतिकृति को चॉदी में विकसित कराया गया है, मण्डलेश्वर के प्राकृतिक शिवलिंग को पैण्डेड के रूप में तैयार कराया गया है। यह सभी सामग्री निगम के एम्पोरियम्स के अतिरिक्त नव-निर्मित दी स्पीकिंग स्टोन एम्पोरियम, हमीदिया रोड, भोपाल के माध्यम से उपलब्ध कराई जा रही है।