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भोपाल सांसद प्रज्ञा ठाकुर को झटका, निर्वाचन के खिलाफ दायर चुनाव याचिका पर होगी सुनवाई
December 13, 2019 • Avi Dubey


   भोपाल 13 दिसम्बर , सांसद प्रज्ञा ठाकुर को जबलपुर हाईकोर्ट से झटका लगा है। हाईकोर्ट जस्टिस विशाल धगट की एकलपीठ ने प्रज्ञा ठाकुर के उस आवेदन को खारिज कर दिया है,जिसमें उनके खिलाफ दायर चुनाव याचिका को सुनवाई के अयोग्य बताया था। प्रज्ञा ठाकुर के निर्वाचन को चुनौती देने वाली चुनाव याचिका पर न्यायालय सुचारू रूप से सुनवाई करेंगा।
  भोपाल निवासी राकेश दीक्षित की तरफ से दायर की गयी चुनाव याचिका में कहा गया था कि साध्वी प्रज्ञा ने चुनाव के दौरान साम्प्रदायिक भाषण दिये। इसके अलावा उन्हें वोट पाने के लिए धार्मिक भावनाओं को भडकाने संबंधित बातों को उल्लेख भी अपने भाषण में किया।  याचिका में लगाये गये आरोपों की पुष्टि के लिए साध्वी के भाषण की सीडी व अखबारों में प्रकाषित खबरों की कटिंग भी याचिका के साथ प्रस्तुत की गयी थी। याचिका में कहा गया की यह कृत्य जनप्रतिनिधित्व कानून की धारा 123 का उल्लंधन है। इसलिए उनके निर्वाचन को षून्य घोषित किया जाये।
 याचिका की सुनवाई के दौरान सांसद प्रज्ञा ठाकुर की तरफ से दायर की गयी से याचिका को खारिज किये जाने की मांग करते हुए आवेदन पेश किया गया था। जिसमें कहा गया था कि साक्ष्य अधिनियम के तहत इलेक्ट्रोनिक साक्ष्य रिकॉर्ड करने तथा कम्प्यूटर से उसकी सीडी बनाने वाले का हलफनामा पेश किया जाना आवश्यक है। याचिका में साक्ष्य अधिनियम का पालन नहीं किया गया है। याचिका के साथ निर्धारित प्रारूप अनुसार हलफनामा पेश नहीं किया गया है। इस कारण से उक्त याचिका खारिज करने योग्य है। याचिकाकर्ता की तरफ से कहा गया था कि अनावेदक की तरफ से अभी तक जवाब पेष नहीं किया गया है। प्रारंभिक स्टेज पर साक्ष्य के आधार पर याचिका े खारिज किये जाने की मांग अनावेदक द्वारा की गयी है।
  दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद एकलपीठ ने 30 नवम्बर को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। एकलपीठ ने शुक्रवार को जारी आदेश में प्रज्ञा ठाकुर के आवेदन को निरस्त करते हुए याचिका पर सुनवाई सुचारू रूप से जारी रखने के आदेश पारित किये है। एकलपीठ ने अपने आदेष में कहा है कि याचिकाकर्ता ने की मांग को पर वर्तमान समय पर विचार नहीं किया जा सकता है। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की तरफ से अधिवक्ता दिनेश उपाध्याय तथा अनावेदक की तरफ से पूर्व महाधिवक्ता पुरूषेन्द्र कौरव ने पैरवी की थी ।