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हंसते खेलते देश को धर्म एवं जाती के नाम पर विघटन करने की घिनोनी साजिश है NRC और  CAA ः सज्जन सिंह वर्मा
December 24, 2019 • Avi Dubey

24 दिसम्बर,

देश में राम मंदिर जैसे बड़े अदालती फैसले के आने पर भी पुरे देश में सोहार्द का माहौल बना रहा, हिन्दू मुस्लिम अन्य धर्म के लोगों ने उच्चतम न्यायालय के फैसले का सम्मान किया और पुरे विश्व को भाईचारे का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत किया। लेकिन शायद भाजपा सरकार को यह अच्छा नहीं लगा, इसीलिए NRC और CAA जैसे संविधान की मूल भावना के खिलाफ लिए गए फैसले देश को थोप रहें है। किसी धर्म विशेष को लेकर जो सरकार ने नीति बनाई है वो सरासर गलत और असंवेधानिक है। भारत की आम जनता विशेषकर गरीब लोगों के लिए नोट बंदी के बाद दूसरी बार लाइन में खड़ा करने की साजिश है, साथ ही देश के लोगों में धर्म के आधार पर विघटन कराकर अपनी राजनीतिक रोटियां सेंकने का एक घिनोना प्रयास है।

असम में सरकार ने NRC लागु किया जिसमे लगभग 3.2 करोड़ की आबादी में 19 लाख लोग ऐसे निकाले जो अपने दस्तावेज उपलब्ध नहीं करा पाए अब उनको अपने दस्तावेज बनवाने के लिए लाइन में लगना होगा। सरकारी विभागों के चक्कर काटने पड़ेंगे यह साबित करने के लिए की वो हिंदुस्तान के ही निवासी है। आज पुरे देश में ऐसे करोड़ो लोग है जिनके पास जरुरी दस्तावेज नहीं है तो क्या वो भारत के नागरिक नहीं कहलाएँगे?  जो 19 लाख लोग अपनी नागरिकता सिध्द नहीं कर पाए है उनको सरकार डिटेंशन सेंटर में रखेगी, जो एक तरह की जेल होगी।

एक और सबसे महत्वपूर्ण पहलू है इसका आर्थिक आंकलन। NRC लागू करने में जो खर्च होगा वह आर्थिक मंदी की मार झेल रहे देश की कमर तोड़ देगा। असम जैसे छोटे से राज्य में NRC के लिए अनुमानित 1200 करोड़ से लेकर 1600 करोड़ का खर्च संभावित है ऐसे में इसे पुरे देश में लागू करने की कीमत लगभग 55000 करोड़ होगी। जिसके वित्तीय प्रबंधन का कोई विकल्प नजर नहीं आता|  साथ ही जिन लोगों को डिटेंशन सेंटर में रखा जाएगा वो अपना रोजगार खुद ही कमाते है, डिटेंशन सेंटर में सरकार उनको जब रखेगी तो उनका खर्च भी सरकार को ही उठाना पड़ेगा जो अनुमानित 30000 करोड़ होगा। यह तो सिर्फ असम राज्य का है। कब तक वो लोग डिटेंशन सेंटर में रहेंगे कोई प्लानिंग नहीं है कोई पालिसी नहीं है। सिर्फ देश की जनता को गुमराह करना, धर्म-जाती के आधार पर फुट डालना ही केंद्र सरकार का मकसद है।  कुल मिलाकर देश की आज की गंभीर समस्याओं जैसे बेरोजगारी, महंगाई, आर्थिक मंदी आदि से जनता का ध्यान बटाकर अपनी राजनीतिक स्वार्थ सिध्दी करना भाजपा सरकार का मकसद है जो बहुत गंभीर और निंदनीय है|

हमारा मकसद साफ़ है हम एक सशक्त और खुशहाल भारत देखना चाहते है और वो आपसी भाईचारे और सोहार्द से ही संभव है। मोदी जी और भाजपा कितना ही प्रयास कर लें, देश के लोग बंटने वाले नहीं है। भारत की तासीर अनेकता में एकता है और देश की गंगा जमुनी तहजीब जब तक देश है तब तक बनी रहेगी।