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इग्नू द्वारा सीबीआरएनई आपदा प्रबंधन में स्नातकोत्तर प्रमाण-पत्र कार्यक्रम के लिए एम्स भोपाल बना लर्नर सर्पोट केन्द्र
December 1, 2019 • Avi Dubey

 देश के प्रतिष्ठित संस्थान इंदिरा गाँधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय द्वारा स्कूल ऑफ हैल्थ साइंसेज (एसओएचएस) का केमिकल बाॅयोलाॅजिकल, रेडियोलाॅजिकल, न्यूक्लियर एवं एक्सप्लोसिव (सीबीआरएनई) आपदा प्रबंधन में छह माह की अवधि का प्रमाण-पत्र कार्यक्रम जनवरी 2020 से प्रारम्भ किया जा रहा है।  एम्स भोपाल ने इंदिरा गाँधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय के साथ इस संदर्भ में 27.06.2019 को समझौता ज्ञापन को हस्ताक्षरित किया।
यह प्रमाण-पत्र कार्यक्रम विभिन्न केन्द्रों पर - नामतः भोपाल, ऋषिकेष तथा जोधपुर स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, एवं निज़ाम चिकित्सा संस्थान, हैदराबाद में क्रियाशील होगा। सीमित संसाधन होने से सीबीआरएनई आपदाओं से निपटना एक श्रमसाध्य कार्य है। इसके लिए ये केन्द्र लर्नर सपोर्ट केन्द्रों के रूप में कार्य करेंगे। इन केन्द्रों पर उपलब्ध सीटों के आधार पर पाठ्यक्रम हेतु चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े कार्मिकों को प्रवेश दिया जायेगा।
 पीजीसीएमडीएम का यह कार्यक्रम अपनी तरह का पहला पाठ्यक्रम होगा जिसके तीन आयाम  निर्धारित किये गये हैं- जिसमें दो सैद्धान्तिक तथा एक प्रयोगात्मक होगा। इनमें सीबीआरएनई आशंका, स्वास्थ्य पर आपदा का प्रभाव तथा सीबीआरएनई का चिकित्सा प्रबन्धन तथा प्रायोगिक पहलु होंगें। यह कार्यक्रम आईएनएमएएस, डीआरडीओ तथा आईडीएस के सहयोग से तैयार किया गया है। यह कार्यक्रम चिकित्सा सेवा वर्ग के कार्मिकों एवं छात्रों तथा आपदा प्रबन्धन में रूचि रखने वाले व्यक्तियों को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है। कार्यक्रम की अवधि न्यूनतम छह माह तथा अधिकतम दो वर्ष की होगी। छह माह वाले कार्यक्रम हेतु समय-चक्र के लिए जुलाई एवं जनवरी प्रारंभिक माह होंगें। उल्लेखनीय है कि यह प्रमाण-पत्र कार्यक्रम सीबीआरएनई के अन्तर्गत सशस्त्र सैनिक बल, पुलिस बल, स्वास्थ्य सेवाएं, रेलवे, एयरपोर्ट, बन्दरगाह, एनडीआरएफ या एसडीआरएफ आदि में संलग्न चिकित्सक तथा अन्य कार्मिकों के लिए भी लाभदायक होगा और इससे चिकित्सकों द्वारा आपदा के दौरान त्वरित चिकित्सा एवं अन्य आवश्यक सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकेंगी। 

 चूंकि देश सीबीआरएनई जनित आपदाओं/दुर्घटनाओं से प्रायः प्रभावित होता रहता है। अतः निश्चित रूप से यह प्रमाण-पत्र कार्यक्रम चिकित्सकों तथा इस व्यवसाय से जुड़े सभी लोगों के लिए इस प्रकार की आपदाओं से निपटने हेतु मील का पत्थर साबित होगा और साथ ही साथ चिकित्सा छात्र भी इससे लाभान्वित हो सकेंगे। प्रवेश हेतु विस्तृत जानकारी इग्नू के साथ-साथ लर्नर सर्पोट केन्द्रों की वेबसाइट पर उपलब्ध है।