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इंडेक्स के चेयरमेन सुरेश सिंह भदौरिया को विदेश जाने की नहीं मिली अनुमति
January 22, 2020 • Avi Dubey

व्यापमं विशेष अदालत ने व्यवसायी लक्ष्मीनारायण मालवीय की अर्जी को भी किया खारिज

भोपाल। व्यापमं मामलों की विशेष अदालत ने इंडेक्स मेडिकल कॉलेज इंदौर के चेयरमेन सुरेश सिंह भदौरिया और इंन्फ्रास्ट्रक्चर व्यवसायी लक्ष्मीनारायण मालवीय के जप्त पासपोर्ट दिए जाने और उन्हें विदेश यात्रा पर जाने की अनुमति देने संबंधी अर्जी को खारिज कर दिया। विशेष न्यायाधीश बीएस साहू ने बुधवार को अर्जी पर सुनवाई करते हुए कहा कि देश में कई तरह के घोटाले होने के आयेदिन समाचार प्राप्त होते रहते हैं। घोटालों में शामिल आरोपित भारत की सीमा से बाहर जाकर अन्य देशों में बस जाते हैं और वहीं की नागरिकता भी प्राप्त कर लेते हैं। भारत की जिस देश से प्रत्यर्पण संधी नहीं होती उन देशों के कानूनी पेंच के चलते आरोपितों को वापस लाना असंभव सा हो जाता है। इसके अलावा विदेशों में बसे आरोपितों को भारत देश में उपस्थित कराने के लिए अंतर्राष्ट्रीय कानून के अनुसार प्रक्रिया अपनाना होती है जो कि जटिल प्रक्रिया होती है जिसमें लम्बा समय लगता है। ऐसे आरोपित देश में अपराध कर विदेशों में जाकर बस जाते हैं और मामले की सुनवाई और दोषी होने के बावजूद सजा से बच जाते हैं। ऐसे मामले में आरोपितों की अर्जी में कोई विशेष ठोस कारण न होने से उन्हें विदेश जाने की अनुमति प्रदान करना उचित प्रतीत नहीं होता। इससे पूर्व इंडेक्स मेडिकल कॉलेज के चेयरमेन सुरेश सिंह भदौरिया ने अर्जी पेश कर निवेदन किया था कि उनकी पुत्री यूएसए वर्जीनिया में निवासरत है और उनकी पुत्री को संतान हुई है। वह उनकी पुत्री से मिलने व पारिवारिक कार्यक्रम व रस्म अदायगी के लिए 15 दिवस के लिए यूएसए जाना चाहते हैं इसलिए उनका जप्त पासपोर्ट प्रदान करने और विदेश जाने की अनुमति दी जाए। दूसरी अर्जी व्यवसायी लक्ष्मीनारायण मालवीय की ओर से थी जिसमें निवेदन किया गया था कि उन्हें उत्कृष्ट कार्य के लिए विदेशों में अवार्ड दिए जा रहे हैं इस संबंध में उन्हें बैंकाक थाईलैण्ड में ग्लोबल अवार्ड, ब्रिसबेन आस्ट्रेलिया में ड्रोन टेनिंग, दुबई यूएई में इंडो गल्फ एचिवर्स अवार्ड और उज्वेकिस्तान में एशिया पेसिफिक अवार्ड में सम्मिलित होना हैं इसके लिए उन्हें विदेश जाने की अनुमति दी जाए और पासपोर्ट प्रदान किया जाए। अदालत ने दोनों ही अर्जी पर बताए गए कारणों को उचित न पाते हुए दोनों ही अर्जियां खारिज कर दी।