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महात्मा गांधी के सिद्धांतों से बाल वैज्ञानिक हुए रूबरू
December 5, 2019 • Avi Dubey

मध्य प्रदेश के 50 जिलों से पहुंचे बाल वैज्ञानिकों ने गिरधर ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशन्स में पढ़े अपने शोध पत्र
पारंपरिक एवं आधुनिक विज्ञान का हुआ समागम


भोपाल- 03/12/2019। राष्ट्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संचार परिषद नई दिल्ली भारत सरकार एवं स्वयंसेवी संस्था साइंस सेंटर (ग्वा) मध्यप्रदेश द्वारा गिरधर ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशन्स मंडीदीप में आयोजित तीन दिवसीय राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस के दूसरे दिन प्रदेश के 50 जिलों से आए बाल वैज्ञानिकों ने अपनी-अपनी परियोजनाओं का प्रस्तुतीकरण किया। प्रदेश के लगभग 250 बाल वैज्ञानिकों ने साइंस कांग्रेस में सहभागिता करते हुए अपने अपने क्षेत्र की स्थानीय समस्याओं को लेकर शोध पत्र प्रस्तुत किए वही मंडीदीप में संचालित विभिन्न शासकीय एवं अशासकीय शालाओं के विद्यार्थियों ने विज्ञान मॉडलों की प्रदर्शनी लगाई। द्वितीय दिन के इस विज्ञान महाकुंभ का शुभारंभ अटल बिहारी वाजपेई हिंदी विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ रामदेव भारद्वाज, सृजन के संयोजक डॉक्टर प्रसन्ना शर्मा, गिरधर ग्रुप के चेयरमैन डॉक्टर एनके तिवारी, साइंस सेंटर (ग्वा) मध्यप्रदेश के अध्यक्ष हेमंत शर्मा, सचिव संध्या वर्मा, एमएलबी कॉलेज के प्राध्यापक डॉ प्रवीण तामोट एवं बरकतउल्ला विश्वविद्यालय के प्रोफेसर डॉ विपिन व्यास की उपस्थिति में हुआ। बाल वैज्ञानिकों को संबोधित करते हुए डॉ भारद्वाज ने कहा कि स्कूली विद्यार्थियों के लिए कक्षा सहित बाहर जाकर सीखने के लिए ऐसा वातावरण तैयार करना होगा जिससे वह वैज्ञानिक ज्ञान का सर्जन कर सके। बाल विज्ञान कांग्रेस इस दिशा में सराहनीय प्रयास कर रहा है। वही गिरधर ग्रुप के चेयरमैन डॉक्टर एनके तिवारी ने कहा कि देश के विकास के लिए अच्छे वैज्ञानिक एवं तकनीकी विद की नितांत आवश्यकता है। बाल विज्ञान कांग्रेस बच्चों को स्कूल स्तर पर ही रिसर्च मेथाडोलॉजी से परिचित कराते हुए उन्हें वैज्ञानिक सोच से जोड़ रहा है जिसे सार्थक पहल कहा जा सकता है।

मंदिरों में चढ़े फूलों का उपयोग कर तैयार की मिथेन गैस - राज्य स्तरीय आयोजन में होशंगाबाद के बाल वैज्ञानिक हेमंत चैरे ने होशंगाबाद में नर्मदा किनारे बने मंदिरों में चढ़ने वाले फूल जिन्हें इधर-उधर अवस्थित फेंक दिया जाता है उसे एकत्र कर उससे मिथेन गैस तैयार किया वहीं इसी जिले की बाल वैज्ञानिक निकिता यादव ने स्कूल परिसर से निकलने वाले रद्दी कागजों को रिसाइकल कर शिक्षण सहायक सामग्री बनाकर सभी को स्तब्ध किया।

मट्ठा, लहसुन एवं नीम की पत्तियों से तैयार किया कीटनाशक दवा - देवरी तहसील जिला सागर के बाल वैज्ञानिक तनुज भारद्वाज ने मट्ठा, लहसुन एवं नीम की पत्तियों को सड़ाकर उससे कीटनाशक दवा तैयार करने सहित खेतों की सुरक्षा के लिए आधुनिक पद्धति का फेंसिंग तैयार कर सबको सोचने पर मजबूर कर दिया।

पारंपरिक विज्ञान के माध्यम से सुरक्षित रखी जाएगी खाद्य सामग्री - खंडवा जिले के बाल वैज्ञानिक शिवम राठौर ने मटका कूल पद्धति से खाद्य सामग्री को सुरक्षित रखने विषय पर अपना शोध पत्र प्रस्तुत किया। बाल वैज्ञानिक द्वारा मिट्टी का ऐसा पात्र तैयार किया गया जिसमें अलग-अलग खाने बनाए गए,जिसमें रोजमर्रा उपयोग में आने वाली सब्जियां एवं खाद्य पदार्थों को 5 से 6 दिन तक सुरक्षित रखा जा सकता है। आयोजन के अंतिम पड़ाव में मंडीदीप इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के चेयरमैन डॉ राजीव अग्रवाल एवं राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के प्रोफेसर एससी चैबे ने महात्मा गांधी के सिद्धांतों के संबंध में उपस्थित बाल वैज्ञानिकों को विस्तार से बताया।

डाॅ0 एन.के. तिवारी
7987775962
कार्यक्रम संयोजन