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नहीं डूबेगा भोपाल को-आॅपरेटिव सेन्ट्रल बैंक का निवेश
November 14, 2019 • Avi Dubey

ग्राहकों की अमानत पूरी तरह सुरक्षित
भोपाल, 13 नवम्बर। भोपाल को-आॅपरेटिव सेन्ट्रल बैंक लिमिटेड के द्वारा यस बैंक में किया गया 10 करोड़ रूपया पूरी तरह सुरक्षित है। यस बैंक भारतीय रिजर्व बैंक के द्वारा मान्यता प्राप्त है। इसमें भोपाल को-आॅपरेटिव सेन्ट्रल बैंक द्वारा एक वर्ष के लिए पैसा जमा किया गया है। अन्य बैंकों से यहां ज्यादा ब्याज मिल रहा था इसलिए निवेश किया गया। उक्ताशय की जानकारी बैंक में आयोजित एक पत्रकार वार्ता में बैंक के मुख्य कार्यपालन अधिकारी आरपी हजारी एवं प्रशासक विनोद कुमार सिंह ने दी।
उन्होंने बताया कि कुछ समाचार पत्रों में प्रकाशित निराधार खबरों के बाद बैंक की वस्तुस्थिति के संबंध में सहकारिता मंत्री को अवगत कराया गया और मंत्री के निर्देश के बाद यह पत्रकार वार्ता आयोजित कर जनसामान्य को सच्चाई की जानकारी दी जा रही है। उन्होंने बताया कि विगत लगभग 60 वर्षों से भोपाल को-आॅपरेटिव सेन्ट्रल बैंक लि ़ भोपाल  लगातार सदस्य कृषकों एवं अपने अमानतदारों को अपनी सेवाएं दे रहा है। यह बैंक वर्ष 2016 तक संचित लाभ में रही है, किन्तु वर्ष 2016 के पश्चात बैंक को व्यवसाय में हानि आना प्रारम्भ हुई जो कि परिचालन कारणों से न होकर शासकीय गारन्टी पर सहकारी संस्थाओं यथा अपेक्स एलडीबी एवं सहकारी शक्कर कारखाना, गुना में किए गए निवेश की वापसी/अदायगी में हुई चूक के कारण , बैंक को समुचित प्रावधान करना पड़ा, जिससे बैंक को हानि उठाना पड़ी है। इस संबंध में तरह-तरह की भ्रान्तियां आए दिन अमानतदारों में देखी जा रही हैं, तथा भ्रम की स्थिति निर्मित हो रही है। हाल ही में कुछ समाचार पत्रों में अपुष्ट समाचार, जैसे निजी बैंक में जमा किए 10 करोड़ यस बैंक में राशि रू ़ 10 करोड़ जमा, आदि शीर्षक से प्रकाशित समाचारों से यह भ्रम और भी गहरा हो रहा है। अतः अपने ग्राहकों एवं हितग्राहियों को सही जानकारी प्रदान करने के उद्देश्य से पत्रकार वार्ता का आयोजन किया गया। पत्रकार वार्ता में यह बताया गया कि यस बैंक में जो राशि निवेश की गई है, के संबंध में तथ्य यह है कि यस बैंक, भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा मान्यता प्राप्त प्राईवेट सेक्टर काॅमर्शियल  शेड्यूल बैंक है जो कि राष्ट्रीय स्तर पर बड़े बैंकों में तीसरा स्थान रखता है। यस बैंक लिमिटेड की वित्तीय स्थिति 31 मार्च 2019 पर प्रकाशित बैलेंस शीट अनुसार: बैंक का शुद्ध लाभ 1720 करोड़, बैंक का एनपीए 2 ़10 प्रतिशत, बैंक का सीआरएआर 16 ़50 प्रतिशत इस प्रकार यस बैंक में किया गया विनियोजन पूर्णतः सुरक्षित श्रेणी का है। यस बैंक में हुए निवेश के संबंध में भी माननीय मंत्री महोदय को बैंक प्रबंधन द्वारा अवगत करया गया कि यह निवेश यस बैंक की सावधि जमा में एक वर्ष हेतु किया गया है जो कि आयुक्त सहकारिता एवं पंजीयक द्वारा निर्धारित किए गए दिशा निर्देश एवं भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा निर्धारित गाइड लाइन्स के अनुरूप ही है।
पत्रकार वार्ता में यह बताया गया कि भोपाल को-आॅपरेटिव सेन्ट्रल बैंक लिमिटेड की वित्तीय स्थिति 31 मार्च 2019 के अनुसार भोपाल बैंक मप्र की किसी भी जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक की तुलना में सर्वाधिक अमानतों वाला बैंक है। अमानतें राशि रू ़ 3042 करोड़ है जिसमें से सावधि अमानतें राशि रू ़ 2500 करोड़ है एवं कासा अमानतें राशि रू ़ 1300 करोड़ का है। भोपाल बैंक मप्र की किसी भी जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक की तुलना में सबसे कम एनपीए वाला बैंक है। बैंक का सकल एनपीए 1 ़65 प्रतिशत है। नेट एनपीए 0 ़81 प्रतिशत नाबार्ड द्वारा अधिकतम 5 प्रतिशत है, जो सहनीय स्तर से कम ही है। भोपाल बैंक द्वारा किसी भी जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक की तुलना में कृषि ऋणों एवं अकृषि ऋणों की सर्वाधिक वसूली की जाती है। वर्ष 2017-18 की स्थिति पर वसूली का प्रतिशत कृषि ऋण 98 प्रतिशत है, किन्तु वर्ष 2018-19 में ऋण माफी की घोषणा के उपरांत भी 63 प्रतिशत वसूली रही है।
भोपाल बैंक को नेफ्सकाब द्वारा राष्ट्रीय स्तर पर सर्वांगीण विकास के लिए पुरस्कृत किया गया है। भोपाल बैंक द्वारा वर्ष 2018-19 के दौरान राशि रू ़ 19 करोड़ का लाभ अर्जित किया गया है। इस प्रकार बैंक को परिचालन गत हानि नहीं हो रही है, हानि का कारण मात्र प्रावधानीकरण है। भोपाल बैंक के पास पर्याप्त मात्रा में तरलता उपलब्ध है तथा एटीएम एवं रूपे डेबिट कार्ड की सुविधा सभी 24 शाखाओं में उपलब्ध है। जिससे ग्राहक पूर्णतः संतुष्ट हैं। भोपाल बैंक का रूपे डेबिट कार्ड सभी बैंकों में मान्य है। भोपाल बैंक का प्रधान कार्यालय एवं 24 शाखाएं मुख्य व्यावसायिक स्थानों पर स्थित हैं। बैंक द्वारा अमानतों पर ब्याज दरें 4 प्रतिशत से 7 ़25 प्रतिशत तक है। वरिष्ठ नागरिकों को आधा प्रतिशत अधिक है। ग्राहकों की अमानतें पुर्णतः सुरक्षित हैं। 
आर पी हजारी, मुख्य कार्यपालन अधिकारी
विनोद कुमार सिंह, प्रशासक