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रबीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय में एड्स पर जागरुकता कार्यक्रम संपन्न
December 17, 2019 • Avi Dubey

भोपाल। रबीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय में एचआईवी एड्स जागरुकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर मध्य प्रदेश एड्स नियंत्रण सोसायटी के टि.एस.यू. के विशेषज्ञ श्री फारुख अहमद जो कि परियोजना अधिकारी उपस्थित थे। श्री फारुख ने एचआईवी एड्स क्या होता है, इसके कारण, रोकथाम की जानकारी, बचाव एवं विभिन्न जानकारियों को छात्रों एवं शिक्षकों से साझा की गई। उन्होंने बताया कि एड्स स्वयं कोई बीमारी नही है पर एड्स से पीडि़त मानव शरीर संक्रामक बीमारियों, जो कि जीवाणु और विषाणु आदि से होती हैं, के प्रति अपनी प्राकृतिक प्रतिरोधी शक्ति खो बैठता है क्योंकि एच.आई.वी (वह वायरस जिससे कि एड्स होता है) रक्त में उपस्थित प्रतिरोधी पदार्थ लसीका-कोशो पर आक्रमण करता है। एड्स पीडि़त के शरीर में प्रतिरोधक क्षमता के क्रमशः क्षय होने से कोई भी अवसरवादी संक्रमण, यानि आम सर्दी जुकाम से ले कर क्षय रोग जैसे रोग तक सहजता से हो जाते हैं और उनका इलाज करना कठिन हो जाता हैं। एच.आई.वी. संक्रमण को एड्स की स्थिति तक पहुंचने में ८ से १० वर्ष या इससे भी अधिक समय लग सकता है। एच.आई.वी से ग्रस्त व्यक्ति अनेक वर्षों तक बिना किसी विशेष लक्षणों के बिना रह सकते हैं। एड्स वर्तमान युग की सबसे बड़ी स्वास्थ्य समस्याओं में से एक है यानी कि यह एक महामारी है। एड्स के संक्रमण के तीन मुख्य कारण हैं - असुरक्षित यौन संबंधो, रक्त के आदान-प्रदान तथा माँ से शिशु में संक्रमण द्वारा। 
इस अवसर पर सूई नामक एक चलचित्र थी (नाको द्वारा निर्मित) दिखाया गया। जिसमें सूई द्वारा लिये जाने वाले नशे के दुस्परिणाम, सामाजिक बुराईयां, गंभीर शारीरिक बीमारियां एवं एड्स नियंत्रण सोसायटी द्वारा चलाये जा रहे नशा निरोधक उपायों की जानकारी छात्रों को दी गयी।
इस मौके पर छात्रों ने एक चित्रकला प्रदर्शनी भी लगायी जिसमें एड्स के मरीजों के साथ मानवीय संवेदनाओं के साथ व्यवहार करने का संदेश बखूबी दिखाया गया। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. विजय सिंह, अधिष्ठाता डॉ. सी.पी. मिश्रा, विभाग प्रमुख डॉ. अविनाश सिंह साथ ही नर्सिंग तथा पैरामेडिकल विभाग के समस्त शिक्षक एवं विद्यार्थी उपस्थित थे। कार्यक्रम में म.प्र. एड्स नियंत्रण समिति (तकनीकि सहयोग विभाग एवं रेड रिबन क्लब) के सहयोग से संपन्न हुआ। 

जनसंपर्क विभाग
रबीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय