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शिक्षण में प्रकृति के नियमों का अध्ययन समाहित होः ब्रह्मचारी गिरीश
January 12, 2020 • Avi Dubey

भोपाल (महामीडिया) विश्वख्याति प्राप्त परमपूज्यनीय महर्षि महेश योगी जी की 103वीं जयंती रविवार 12 जनवरी को  रंगारंग सांस्कृतिक महोत्सव के साथ मनाई गई । इस अवसर पर दो दिवसीय महर्षि ज्ञानयुग महोत्सव ब्रह्मनंद सरस्वती आश्रम छान में हुआ। इस अवसर पर महर्षि महेश योगी विश्वविद्यालय के कुलाधिपति, महर्षि विश्व शांति आंदोलन एवं महर्षि विद्यामंदिर विद्यालय समूह के अध्यक्ष ब्रह्मचारी गिरीश ने अपने संबोधन में कहा कि ‘आज का दिन ज्ञानयुग दिवस है यह हमारे गुरू का 103वां जन्म दिवस है। महर्षि महेश योगी जी ने जो ज्ञान का प्रकाश पूरी दुनिया को दिया और जो संकल्प लिये उन सभी को हम सब को पूर्ण करना है। यह सभी संकल्प अपने आप में पूर्ण एवं स्वंयसिद्ध है। हम सभी लोग निमित्य मात्र हैं । महर्षि जी का झुकाव विद्यार्थी जीवन से ही आध्यात्म की ओर था। एक बार गुरूदेव ब्रह्मनंद सरस्वती जबलपुर में चर्तुमास के लिए आए हुए थे। तब उनकी मुलाकात पहली बार महर्षि महेश योगी जी से हुई। प्रथम दर्शन में ही महर्षि महेश योगी जी ने गुरूदेव ब्रह्मनंद सरस्वती को अपना गुरू बना लिया। महर्षि जी ने स्वयं एक करोड़ लोगों को भावातीत ध्यान का प्रशिक्षण देकर कीर्तिमान रचा है। 20-25 वर्ष पूर्व ज्योतिष एवं स्थापत्यवेद को कोई जानता नहीं था तब महर्षि जी ने इसको व्यापक फलक प्रदान किया। जिस दशक में पूरी दुनिया में संचार एवं आवागमन के साधन नहीं थे उस समय महर्षि जी ने कई उल्लेखनीय कार्य किए। महर्षि जी ने उस दशक में इतनी बड़ी सामाजिक अभियात्रिकी एवं प्रबंधन को साकार किया जो अकल्पनीय है। उनका कहना था चेतना समस्त संभावनाओं का क्षेत्र है हम जो चाहे वह कर सकते हैं। अपने अंदर वह योग्यता लाओ जिससे सारी योग्यताएं आ जाए। अपनी चेतना पर कब्जा करलो, उसे जागृत कर लो फिर सब कुछ संभव है। जिस तरह हम एक डोरी से पतंग उड़ाते हैं उसी प्रकार पूरा जीवन चेतना से संचालित है। इस सब के पीछे महर्षि जी की सोच थी कि संपूर्ण मानवता खुश रहे, आनंदित रहे, प्रसंन्न रहे। हम सभी महर्षि संस्थान के लोग उसी परंपरा के धनी एवं संवाहक है जिसको आगे बढ़ाने का दायित्व हम सब के ऊपर है। इस अवसर पर राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय भोपाल के कुलपति प्रो. व्ही. विजय कुमार ने कहा कि आदरणीय गिरीश जी की परिकंल्पना वसुधैव कुटुम्बकम अर्थात् संपूर्ण विश्व ही परिवार है कि परंपरा ही हमें विश्व शांति की ओर ले जा सकती है। इसलिए मेरा मानना है कि प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत से कानून एवं विधि को परीपूर्ण किया जाए और इसमें सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि विधि के पाठ्क्रमों में बदलाव के समय इसको समाहित किया जाए।
इसके पश्चात ब्रह्मचारी गिरीश जी ने स्मृति चिन्ह देकर संस्कृत एवं ज्योतिष के प्रकांड विद्वान विजय द्विवेदी को उनकी उल्लेखनीय एवं सुदीर्घ सेवाओं के लिए महर्षि सम्मान से सम्मानित किया।
इसके पश्चात महर्षि विद्यामंदिर विद्यालय समूह के उपाध्यक्ष डा. प्रकाश जोशी ने महर्षि संस्थान के टी.पी.एस. कांद्रा, वेद प्रकाश शर्मा, हरीश सचान, वीरेद्र पटेल, गुलशन चावला, नीतेश परमार, धर्मेंद्र सिंह ठाकुर, वासुदेव द्विवेदी, रामदेव द्विवेदी, जयप्रकाश शर्मा, श्रीकांत अवस्थी, आचार्य निलिम्प त्रिपाठी एवं विल्डर अजय ग्रोवर, भवन निर्माता चंद्रेश जैन, विजनेश टाइकून नवरतन अग्रवाल, फारेस्ट एक्सपर्ट डी.पी. तिवारी, पूर्व न्यायधीश एवं सुप्रसिद्ध अधिवक्ता विजय चौधरी को उनकी उल्लेखनीय सेवाओं के लिए पुष्पगुच्छ देकर सम्मानित किया गया।
इसके पश्चात महर्षि सेंटर फार एजूकेशनल एक्सीलेंस लांबाखेड़ा भोपाल एवं महर्षि विद्यामंदिर अयोध्या नगर, त्रिलंगा एवं रतनपुर के बच्चों ने नृत्य एवं गायन की शानदार प्रस्तुतियां दी।
सांस्कृतिक कार्यक्रम के सायकालीन सत्र में शीर्ष कत्थक नृत्यांगना मुक्ति श्री, कत्थक नृत्यांगना आयुषी दीक्षित, कत्थक नर्तक रजत पवार, कत्थक नृत्यांगना अनवि श्री, तबला वादक अक्षय कुलकर्णी, पखावज वादक कृष्णा सुलंके, हारमोनियम वादक देवेंद्र देशपांडे एवं प्रफुल्ल सोनकांबले ने अपनी-अपने विधाओं की शानदार प्रस्तुतियां दी जिसे दर्शकों ने खूब सराहा एवं संपूर्ण महर्षि उत्सव भवन सभागार आनंदित हो उठा।