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उगते हुए सूर्य को अर्ध्य देकर सूर्य उपासना का महापर्व छठ पूजनोत्सव धूम-धाम एवं हर्षोल्लास से सम्पन्न
November 4, 2019 • Avi Dubey

भोपाल. सूर्य उपासना का सबसे बड़ा त्यौहार एवं भोजपुरी, मगही एवं मैथली समाज का महापर्व छठ बिहार सांस्कृतिक परिषद द्वारा सरस्वती मंदिर प्रांगण, ई सेक्टर बरखेड़ा में आयोजित किया गया। परिषद के महासचिव सतेन्द्र कुमार ने कहा कि 25 -30 हजार से अधिक छठव्रती श्रद्धालु उगते हुए सूर्य को अर्ध्य अर्पित कर पारण किया। प्रांगण में बने तीनो सूर्य कुंडो में भरे नर्मदा जल में कमर तक पानी मे प्रवेश कर सूर्य की उपासना एवं छठ मइया की आराधना किया।
रविवार प्रातः 04 बजे से ही उगते हुए सूर्य को अर्ध्य देकर यह महापर्व छठ मइया के मधुरिम गीत "उग हो सुरुज देवा, भइल अरगा के वेल" एवं केलवा के पात तर उगहो सुरुज देवा झांके झुकी..... ये करेलु छठ वरतिया झांके झुके... धूम - धाम एवं हर्षो उल्लास के साथ सम्पन हुआ।
 इस महापर्व के सफल एवं पवित्रता के साथ आयोजन के लिए बिहार सांस्कृतिक परिषद् द्वारा हर वर्ष की भांति विशेष व्यवस्था की गयी. इस छठ घाट स्वच्छता अभियान को जारी रखते हुये पवित्रता एवं स्वछता के महापर्व छठ पूजनोत्सव की व्यापक तैयारी की गयी जिसमे परिषद् के सदस्यों एवं छठवर्ती श्रद्धालुगण ने भेल एवं नगर निगम की सहायता से पूरे घाट एवं कुंड की सफाई की. माननीय महापौर, विधायक एवं नगर निगम के उच्च अधिकारीयों के विशेष निर्देश पर नगर निगम द्वारा अस्थायी स्नानघर, महिला छठव्रती के लिए चेंजिंग रूम, फव्वारे, मंच एवं चलित टॉयलेट की विशेष व्यवस्था की गयी तथा छठवर्ती श्रद्धालुओ के लिए अर्ध्य देने, बैठने की समुचित एवं उत्तम व्यवस्था, नियोजित पार्किंग की व्यवस्था परिषद के कार्यकर्ताओं द्वारा की गयी.
महापर्व छठ पूजनोत्सव को भक्तिमय एवं धार्मिकता के साथ आध्यात्मिक रूप देने के लिए सरस्वती देवी मंदिर प्रांगण मे ही 03 नवम्बर, 19 पारण को सुबह 04 बजे से से 09 बजे तक छठ मईया एवं उदयमान सूर्य देवता के मधुरिम भजनों, देवी जागरण एवं भजन गायन की मनमोहक एवं सुन्दर प्रस्तुति बिहार के प्रसिद्ध गायक भोजपुरी गायन की अन्तराष्ट्रीय फेम डॉ नीतू कुमारी नूतन, सुर संग्राम विजेता श्री रघुवीर शरण श्रीवास्तव एवं सुप्रसिद्ध भजन गायक श्री मनोज अहिरवार एवं टीम द्वारा दी गयी। यह छठ प्रसंग में पारंपरिक लोक गायन 02 नवम्बर शाम 04 बजे से प्रारंभ हुई थी। जिसे उपस्थित जन समुदाय ने सर्वाधिक पसंद किया.
इस पावन अवसर पर संस्कृति संचालनालय, मध्यप्रदेश शासन के मध्यप्रदेश भोजपुरी अकादमी द्वारा “छठ प्रसंग” के अंतर्गत छठ पारंपरिक गायन का भव्य आयोजन किया गया.  
छठ पूजा परिसर में भव्य मेले का मनमोहक आयोजन किया गया जिसके मुख्य आकर्षण बच्चों के मनोरंजन के लिए झूले, मिक्की माउस, बैलून शूटिंग एवं अन्य गेम उपलब्ध हैं. इस अवसर पर धार्मिक पुस्तकें, परिधान एवं अन्य प्रदर्शनी एवं बिहारी संस्कृति के विभिन्न प्रकार के व्यंजन जैसे लिट्ठी चोखा अदि के स्टॉल लगाए गए. कार्यक्रम के समापन अवसर पर चाय, सुप एवं प्रसाद (ठेकुआ आदि) का वितरण किया गया।
कार्यक्रम में पूर्व मंत्री एवं विधायक नरेला विश्वास सारंग, शहर के महापौर आलोक शर्मा, भोपाल सांसद प्रज्ञा सिंह ठाकुर, क्षेत्रीय विधायक कृष्णा गौर एवं मध्य प्रदेश शासन के अनेक प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारी विशेष रूप से उपस्थित हुए।
परिषद के कार्यकर्ताओं, नगर निगम एवं भेल नगर प्रशासन के लोगो ने कठिन परिश्रम एवं लगन से प्रांगण की साफ-सफाई, लाईटिंग एवं साज–सज्जा से महापर्व छठ पूजनोत्सव को यादगार बना दिया. महापर्व छठ पूजनोत्सव के भव्य आयोजन में लगभग 25 - 30 हजार श्रद्धालु एवं भक्तगण शामिल हुए. परिषद के महासचिव सतेन्द्र कुमार ने कहा कि परिषद् द्वारा समय समय पर विभिन्न प्रकार के सांस्कृतिक एवं धार्मिक आयोजन जैसे सरस्वती पूजा, डॉ. राजेंद्र प्रसाद जयंती एवं परिषद द्वारा संचालित विधालयों के सांस्कृतिक कार्यक्रम भी बड़े पैमाने पर आयोजित किये जाते हैं.
विशेष
परिषद के महासचिव सतेन्द्र कुमार ने कहा कि परिषद् के सदस्यों द्वारा स्वच्छ्ता एवं पवित्रता का सबसे बड़ा पर्व छठ पूजा हेतु सूर्य कुंडों एवं प्रांगण की पवित्रता अक्षुण रखते हुए छठ वर्ती श्रद्धालु एवं भक्तो की सुविधा हेतु परिषद के कार्यकर्ता लगातार स्वच्छता अभियान चलाया गया. परंपरा अनुसार इस महापर्व में स्वच्छता का विशेष ध्यान रखना होता है जिसमे प्लास्टिक का उपयोग प्रतिबंधित रहता है। केवल वनस्पतियों के बने सामग्री ही उपयोग करते है. बांस के बनाये सूपा, डलिया और दौरा का उपयोग किया जाता है एवं प्रसाद के रूप में अनेक प्रकार के फल, गाजर, मूली, गन्ना, अनाज का ही उपयोग किया गया.
छठ महापर्व के बारे में
भगवान सूर्यदेव के प्रति भक्तों के अटल आस्था का अनूठा पर्व छठ हिन्दू पंचांग के अनुसार कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष के चतुर्थी से सप्तमी तिथि तक मनाया जाता है. छठ पूजा या सूर्य षष्ठी एक प्राचीन हिंदू पर्व हैं जिसमे पृथ्वी पर जीवन को बनाए रखने के लिए सूर्य भगवान को आभार व्यक्त किया जाता है. सूर्य जिसे अनवरत एवं सतत ऊर्जा और जीवन शक्ति के देवता के रूप में माना जाता है उसकी छठ त्योहार के दौरान भलाई समृद्धि और प्रगति को बढ़ावा देने के लिए पूजा की जाती है. ऐसा माना जाता है कि सूर्य की पूजा कुष्ठ रोग सहित विभिन्न प्रकार के बीमारियों के निवारण कर सकती है और परिवार के सदस्यों मित्रों और बुजुर्गों की लंबी उम्र और समृद्धि सुनिश्चित कर सकती है। इस दिन जल्दी उठकर अपने घर के पास एक झील, तालाब या नदी में स्नान किया जाता है. स्नान करने के बाद नदी के किनारे खड़े रह कर सूर्यास्त एवं सूर्योदय के दौरान सूर्य को अर्घ्य देते हुए छठ पूजा की जाती है. शुद्ध घी का दीपक जलाकर और सूर्य को धूप और फूल अर्पण किया जाता है. सात प्रकार के फूल, चावल, चंदन, तिल आदि से युक्त जल को सूर्य को अर्पण कर शीश झुका कर प्रार्थना करते हुए “ओम गृहिणी सूर्यया नमः” या “ओम सूर्यया नमः” 108 बार किया जाता है.  इच्छानुसार पूरे दिन भगवान सूर्य के नाम का जप जारी रख सकते हैं.
छठ व्रत कथा
दिवाली के ठीक छह दिन बाद मनाए जानेवाले इस महाव्रत की सबसे कठिन और साधकों हेतु सबसे महत्त्वपूर्ण रात्रि कार्तिक शुक्ल षष्टी की होती है, जिस कारण हिन्दुओं के इस परम पवित्र व्रत का नाम छठ पड़ा. चार दिनों तक मनाया जानेवाला सूर्योपासना का यह अनुपम महापर्व मुख्य रूप से बिहार, झारखंड, उत्तरप्रदेश सहित सम्पूर्ण भारतवर्ष में बहुत ही धूमधाम और हर्सोल्लासपूर्वक मनाया जाता है. यूं तो सद्भावना और उपासना के इस पर्व के सन्दर्भ में कई कथाएं प्रचलित हैं, किन्तु पौराणिक शास्त्रों के अनुसार जब पांडव जुए में अपना सारा राजपाट हार गए, तब द्रौपदी ने छठ का व्रत रखा, फलस्वरूप पांडवों को अपना राजपाट मिल गया.
छठ व्रत विधि
कथानुसार छठ देवी भगवान सूर्यदेव की बहन हैं और उन्हीं को प्रसन्न करने के लिए भक्तगण भगवान सूर्य की आराधना तथा उनका धन्यवाद करते हुए मां गंगा-यमुना या किसी नदी के किनारे इस पूजा को मनाते हैं. इस पर्व में पहले दिन घर की साफ सफाई और शुद्ध शाकाहारी भोजन किया जाता है, दूसरे दिन खरना का कार्यक्रम होता है, तीसरे दिन भगवान सूर्य को संध्या अर्घ्य दिया जाता है और चौथे दिन भक्त उदियमान सूर्य को उषा अर्घ्य देते हैं। मान्यता है कि यदि कोई इस महाव्रत को निष्ठां और विधिपूर्वक संपन्न करता है तो निःसंतानों को संतान की प्राप्ति और प्राणी को सभी प्रकार के दुखों और पापों से मुक्ति मिलती है.
सतेन्द्र कुमार
महासचिव
बिहार सांस्कृतिक परिषद
भेल, भोपाल
मो. 8103513013