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विश्व रंग महोत्सव भारत ही नहीं पूरे एशिया का पहला आयोजन
November 5, 2019 • Avi Dubey

विश्व रंग के शुुभारंभ पर महामहिम राज्यपाल लालजी टंडन ने कहा गुरूदेव को इस आयोजन से बड़ी श्रद्धांजलि नहीं हो सकती 
 
भोपाल. विश्व में अनेक विद्वान हुए है लेकिन इतनी सारी विधाओं का ज्ञान दुर्लभ है। एक व्यक्ति में इतनी प्रतिभाएं हों और समाज को देने के लिए इतने विषयों का ज्ञान भी दुर्लभ है। यदि भारत कभी विश्व गुरू रहा है तो आज के युग के भारत के गुरूदेव रवीन्द्र नाथ टैगोर है, कौन सी संस्कृति की विधा है जो गुरूदेव ने समाज को नहीं दी। उन्होंने कहा कि विश्व महोत्सव भारत ही नहीं पूरे एशिया का पहला आयोजन है। गुरूदेव को इससे बड़ी श्रद्धांजलि नहीं हो सकती जो इस आयोजन के माध्यम से दी जा रही है। 
 
उक्त विचार मध्यप्रदेश के महामहिम राज्यपाल श्री लालजी टंडन ने व्यक्त किए। वे विश्वरंग के शुभारंभ अवसर रवीन्द्र भवन में आयोजित शुभारंभ समारोह में संबोधित कर रहे थे। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे आयोजन अब तक भारत ही नहीं पूरे एशिया में नहीं हुए जो मध्यप्रदेश के भोपाल में हो रहा है। उन्होंने रबीन्द्रनाथ विश्वविद्यालय परिवार को शुभकामनाएं दीं। 
 
इस मौके पर विश्व रंग के निदेशक और रबीन्द्र नाथ टैगोर विश्वविद्यालय के कुलाधिपति  संतोष चौबे ने कहा की देश में पहली बार किसी शैक्षणिक संस्थान द्वारा इस तरह साहित्य एवं संस्कृति को लेकर अंतर्राष्ट्रीय विश्व कला महोत्सव आयोजित किया जा रहा है। इसमें 60 विभिन्न सत्रों में 500 से ज्यादा कलाकार शिरकत कर रहे है। साथ ही हिन्दी और भारतीय भाषाओं के साथ बोलियों के संरक्षण को लेकर कार्य किया जा रहा है। 
 
गीतांजलि: गीत-संगीत और नृत्य में प्रकट हुई टैगोर की विरासत
 
'विश्व रंग' के मंच पर शुभारंभ संध्या रबीन्द्रनाथ टैगोर की कविताओं पर आधारित नृत्य संगीत रूपक 'गीतांजलि' को देखने कलाप्रेमियों के लिए अनूठा अनुभव रहा। प्रतिभाशाली युवा नृत्यांगनाओं श्वेता देवेन्द्र और क्षमा मालवीय की परिकल्पना और निर्देशन में अस्सी से भी ज्यादा बच्चों और युवा कलाकारों ने मिलकर टैगोर की सांस्कृतिक विरासत को सुंदर अभिव्यक्ति प्रदान की। 
प्रस्तुति की शुरूआत मंगलाचरण से हुई, जिसमें सब के सुखी और आनंदमय होने की कामना थी। दूसरी प्रस्तुति थी- 'आनंद धारा बहे रे जग में' टैगोर की ही जीवन, प्रकृति और प्रेम से सराबोर अन्य कविताओं में 'एकला चलो रे' का मंचन सभी दर्शकों को करतल ध्वनि के लिए विवश कर गया। भरत नाट्यम और कथक शैलियों के साथ ही 'गीतांजलि' में भारतीय लोक नृत्य और आधुनिक नृत्य शैली का समावेश भी उसे सुंदर छवि प्रदान करता रहा। प्रकाश परिकल्पना अनूप जोशी बंटी ने की। 'गीतांजलि' की विषय-वस्तु को रोचकता के साथ प्रस्तुत किया- कला समीक्षक विनय उपाध्याय ने। 
दरअसल गुरुदेव रबीन्द्रनाथ टैगोर एक महासागर है जिसमें स्वर शब्दों की अनन्त लहरें हिलोरें लेती रहती हैं। वह कवि, गीतकार, कथाकार, निबन्धकार, नाटककार, संगीतकार, चित्रकार सभी कुछ एक साथ हैं। टैगोर के शब्दों ने भारत की भावधारा रची। हमारी संस्कृति का श्रेष्ठतम पुनर्मूल्यांकन हुआ था। उनकी कविता प्रकृति की सरसराहट में उस विराट की आहट सुनती है, प्रकृति के विभिन्न रंगों से सजती-सँवरती जीवन-पर्व के दरवाज़े पर दस्तक देती है और कभी गहन संवेदनाओं से भरकर मानवता को पुकार उठती है। उनके षब्द मोती हैं, राग-रागिनियों ने उन्हें गूँथकर जो गीतों की माला पिरोई तो अपनी पहचान छोड़ उनके ही रंगों में रंग गयी। 'रवीन्द्र संगीत' का उजास मिल गया। इस आलोक में वो झिलमिलाती रही। अपनी इस नयी पहचान को गुनगुनाती रही। रबीन्द्रनाथ टैगोर विश्व-संगीत की मंगल-ध्वनि है जो प्रेम, करुणा और मानवता की ज़मीन से उठती हैं और पूरी दुनिया में फैल जाती है। 
इससे पूर्व रंगकर्मी और कला विदुषी उषा गांगुली और विश्वरंग के निदेशक संतोष चौबे ने श्वेता देवेन्द्र और क्षमा मालवीय को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया। संचालन विश्वरंग के समन्वयक विनय उपाध्याय ने किया। 
  
पूर्वरंग में गुदुम बाजा और कबीर गायन 
 
इससे पहले पूर्वरंग में रवीन्द्र भवन के प्रांगण में मध्यप्रदेश के गौंड आदिवासी समुदाय में प्रचलित वाद्य गुदुम बाजा ने सबका मन मोह लिया। दरअसल गुदुम बाजा एक ताल वाद्य है जो बैल के चमड़े को एक खोल पर चढ़ाकर छड़ी से आघात किया जाता है। इसके साथ ही मालवा की लोक संस्कृति से जड़ी वाचिक परंपरा की अलख जगाने वाले लोक कलाकार दयाराम सारोलिया ने कबीर के निर्गुण भक्ति पदों का गायन किया। उनके निर्गुण पदों ने रवीन्द्र भवन प्रांगण में उपस्थित श्रोताओं को आध्यात्मिक अनुभूति कराई। 
'विश्वरंगः टेगौर को पुष्पांजलि और अशोक भौमिक के चित्र प्रजेंटेशन के साथ हुई कला महोत्सव की शुरुआत'
 
रबीन्द्रनाथ टैगोर यूनिवर्सिटी द्वारा आयोजित किये जा रहे विश्व सहित्य और कला महोत्सव का आगाज टैगोर विश्वविद्यालय में टैगोर की प्रतिमा पर पुष्पांजलि के साथ हुआ। इस दौरान कार्यक्रम के मुख्य अतिथि वरिष्ठ चित्रकार प्रभाकर कोल्टे, विशिष्ट अतिथि अशोक भौमिक, विश्वविद्यालय के कुलाधिपति संतोष चौबे, विश्व रंग के सह निदेशक लीलाधर मंडलोई विशेष रूप से उपस्थित रहे। कोलकाता से आये कलाकर शुभव्रत सेन और मानस सरकार ने दो तारा पर रविन्द्र संगीत की प्रस्तुति दी। 
 'टैगोर की चित्र विरासत का हुआ अवलोकन'
 विश्व रंग के पहले दिन मंगलाचरण और राष्ट्रगान के साथ रवीन्द्रनाथ टैगोर के द्वारा बनाए हुए चित्रों की प्रदर्शनी का लोकार्पण विश्वविद्यालय के  शारदा  सभागार में हुआ। इस दौरान विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राओं ने अपने एंथम गीत की प्रस्तुति भी दी।
इसके बाद टैगोर के बनाये हुए चित्रों पर जाने-माने चित्रकार अशोक भौमिक ने अतिथियों और डेलिगेट्स से चर्चा की, भौमिक ने बताया कि टैगोर दृश्य नहीं बल्कि स्मृति चित्रण करते थे। टैगोर का मानना था कि रेखाओं और रंगों की कोई भाषा नहीं होती, वो शब्दों को काटकर चित्र का निर्माण किया करते थे। गौरतलब है कि टैगोर के चित्रों को पहली दफा किसी कार्यक्रम में प्रदर्शित किया गया है। चित्र प्रदर्शनी पर प्रभाकर कोल्टे ने कहा कि टैगोर दिल से चित्रकारी करते थे, जो उनके चित्रों से साफ झलकता है। 
 'कलाकारों को स्मृति चिन्ह भेंटकर किया गया सम्मानित'
 विश्व रंग के पहले दिन आर्टिस्ट मीट में शामिल होने जयपुर से आए चित्रकार लोकेश जैन, लखनऊ के राजन श्रीपद फुलारी और जबलपुर से आई सुप्रिया अंबर को स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया। चित्रकारों ने कहा कि विश्व रंग देशभर के कलाकारों के लिए बड़ा मंच है, हमें खुशी है कि हम विश्व रंग का हिस्सा बन सके। इस दौरान सभागार में मौजूद छात्र-छात्राओं के प्रश्नों के उत्तर भी अतिथियों ने दिए। 
 'प्रभु जोशी और निकिता के बनाये पोट्रेट्स प्रदर्शित'
 जाने-माने चित्रकार प्रभु जोशी द्वारा बनाए गए वनमाली जी के पोर्ट्रेट का लोकार्पण कार्यक्रम के दौरान मुख्य अतिथियों द्वारा किया गया। वहीं आमंत्रित चित्रकार निकिता के बनाए हुए रवीन्द्र नाथ टैगोर के पोर्ट्रेट को भी प्रदर्शित किया गया।
 'विद्यार्थियों ने रैली निकालकर दिया विश्वरंग का संदेश'
कला और संस्कृति के महाकुंभ विश्व रंग के पहले दिन विद्यार्थियों ने विश्विद्यालय परिसर में रैली के माध्यम से विश्व रंग का परिचय दिया, साथ ही विश्व रंग के उद्देश्य के बारे में भी बताया। टैगोर विश्वविद्यालय के छात्र छात्राओं के साथ-साथ कार्यक्रम के अतिथि एवं आमंत्रित कलाकार भी शामिल हुए।
 'विश्वरंग का सेल्फी पॉइंट बना आकर्षण का केंद्र'
 टैगोर विश्वविद्यालय में विश्वरंग के थीम पर सेल्फी प्वाइंट का निर्माण भी किया गया है जो युवाओं के लिए कार्यक्रम के दौरान मुख्य आकर्षण का केंद्र बना रहा। इस सेल्फी प्वाइंट को इंद्रधनुषी रंगों से सजाया गया है। छात्र छात्राओं के साथ देशभर से आए डेलिगेट्स और अतिथियों ने भी सेल्फी प्वाइंट पर कई पिक्चर्स क्लिक की।
 'टैगोर के स्वप्न को सामायोजित कर रहा है विश्वरंगः मंडलोई'
 विश्वरंग के सह निदेशक लीलाधर मंडलोई ने कहा कि विश्व रंग टैगोर के स्वप्न को समायोजित करने वाला आयोजन है। जिसमें देश के सभी क्षेत्रों से कलाकारों को आमंत्रित किया गया है। मंडलोई ने बताया कि मंगलवार को भारत भवन में राष्ट्रीय कला प्रदर्शनी भी आयोजित की जा रही है, जिसमें भारत के विभिन्न क्षेत्रों के कलाकारों द्वारा बनाए गए चित्रों को प्रदर्शित किया जाएगा। इस प्रदर्शनी के लिए एक हजार से अधिक प्रविष्टियां आई थी जिनमें से कुल 158 प्रविष्टियों को चयनित किया गया है। वहीं सबसे बेहतरीन पांच प्रविष्टियों को विश्वविद्यालय द्वारा 50 हजार रुपए की प्रोत्साहन राशि भी दी जाएगी। कार्यक्रम का संचालन विनय उपाध्याय ने और आईसेक्ट विश्वविद्यालय के निदेशक सिद्धार्थ चौबे ने आभार व्यक्त किया।